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बुधवार, 13 जनवरी 2021

जउन खेतवा में करेले किसानी भैया - jaun khetwa me karele kisani bhaiya - Kisan Andolan


जउन खेतवा में करेले किसानी भैया ,

उहे हवें हमरो देश के अन्नदाता भैया। 

जिन बॉर्डर पर बाड़े तम्बू के छहियाँ ,

उ का जानिहै खेती के मरम भैया। 


खाये चिकन मटन और दारु ,

इनसे दुखी रहे मेहरारू । 

आके बॉर्डर पर बैठ गइले, 

आवल गइल मुश्किल कइले । 


अब तो कोर्ट कहत बा जाग, 

बोरिया बिस्तर लेके भाग । 

न तो बात बिगड़ जाई आगे, 

कोरोना कहर देश में ब्यापे । 


लागि सभे छोड़ छोड़ भागे, 

आंदोलन बंद होइ तब जाके। 

लागी लुआठी किटनीति में, 

उहे जीती जे सत्य शरण में । 

  #KisanAndolan, #farmerprotest, #krishikanun, #farmerslaw


मंगलवार, 12 जनवरी 2021

ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना - ai krishna ahi gokule me rahuna

ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 

जउने सुख बा नन्द नगरी में 

तउने सुखवा कहूं ना 

ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 


रोज सबेरे उबटन मलके 
इत्तर से नहवाईब 
एक महीना के भीतर 
करिया से गोर बनाइब 
झूठ कहत न बानी तनिको 
मौका ईगो देहु ना 
ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 



नित नवीन मन भावन व्यंजन 
परोसब कंचन थारी 
स्वाद भूख बढ़ी जाई  सुन 
गोपी ग्वालन के वाणी 
बार बार हम करब चिरौरी 
औरि कुछ लेहु ना 

ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 



निधिवन जी में नित आ आ के

तोह संग रास रचायब 

यमुना जी में कनक नैया पे 

झिझिरी खुब  खेलायब 

पवन देव से करब निहोरा 

हउले हउले बहुना 

ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 


हमरे निहोरा नंदनंदन से  

माने या न माने 

पर राधा रानी के नाते 

गोपिन के आपन जाने 

या गोकुले में रही जइयो या 

संग अपने ले चालू ना 

ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 


ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 

जउने सुख बा नन्द नगरी में 

तउने सुखवा कहूं ना 

ऐ कृष्णा एहि गोकुले में रहुना 

 => मुकुल मकरंद =>रचित


हरि गुण गाने को जी चाहता है - Hari Gun Gane ko ji chahta hai

हरि  गुण  गाने  को जी चाहता है


हरि  गुण  गाने  को जी चाहता है। 
प्रभु पद पाने  को जी चाहता है।।

ओ  चितचोर जो ओझल  भी है सामने भी। २ 
उससे नजरे मिलाने को जी चाहता है। ।

हरि  गुण  गाने  को जी चाहता है। 
प्रभु पद पाने  को जी चाहता है।। 

ओ  भक्ति जिससे मुक्ति पाती है दुनिया २ 
उसमे  डूब  जाने को जी चाहता है। 

हरि  गुण  गाने  को जी चाहता है। 
प्रभु पद पाने  को जी चाहता है।।

झलक एक तेरी ओ मैंने जो पायी । २ 
कि फिर दर्शन पाने को  जी चाहता है। । 

हरि  गुण  गाने  को जी चाहता है। 
प्रभु पद पाने  को जी चाहता है।।





रविवार, 28 जून 2020

आलस का परिणाम - आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपु

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपु . नास्ति उद्यम समो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति .

मानव शरीर के अन्दर रहने वाला आलस्य ही मनुष्य का सबसे बडा शत्रु है. साथ ही उद्यम के सामान कोइ मित्र नहि है जिससे हम प्रसन्न हो सके .

शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2019

नरक चतुर्दशी २०१९ - narak chaturdashi 2019

नरक चतुर्दशी की कहानी 

नरक चतुर्दशी इस बार २७ अक्टूबर २०१९ को मनाया जायेगा. इसे रूप चतुर्दशी तथा काली चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली के पूर्व संध्या पर मनाया जाता है तथा छोटी दिवाली के नाम से विख्यात है।

नरक चतुर्दशी की कहानी नरकासुर से जुडी है। नरकासुर धरती का पुत्र था।  उसका साम्राज्य बहुत  विशाल था। अपने विस्तारवादी निति के कारण वह पुरे पृथ्वी का साम्राज्य अपने अधीन कर लिया। साम्राज्य विस्तार की उसका इच्छा दिनों दिन बढ़ते चले जा रही थी एक दिन वह स्वर्ग पर आक्रमण कर स्वर्ग का राजा बनने को उद्यत हो गया। इसके भय से इंद्र भगवान विष्णु के पास गए और उनसे अपने रक्षा की मांग की।


नरकासुर का वध 


नरकासुर को ब्रह्मा जी का वरदान था कि वह किसी पुरुष के मारे नहीं मरेगा. इंद्र के अनुरोध पर भगवान विष्णु गरुण पर सवार हो गए और रानी सत्य भामा के सारथी  बन गए. देवी सत्यभामा ने नरकासुर का वध कर दिया।


नरक चतुर्दशी कैसे मनाएं

धनतेरस की कहानी                                                                                                          

 इस दिन, सूर्योदय से पहले स्नान करना बहुत शुभ और शुद्ध माना जाता है। नरक चतुर्दशी पर्व से पहले, कार्तिक माह में एक अंधेरे चंद्र पखवाड़े के दौरान अहोई अष्टमी के दिन एक बर्तन को भर दें। पूजा के नरक चतुर्दशी के दिन, अपने स्नान के पानी के साथ बर्तन से पानी मिलाएं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से आप पानी को चार्ज करते हैं और आपके धिक्कार के डर से लड़ते हैं। दिवाली समृद्धि उपहार पैक ऑनलाइन खरीदें इसके बाद, मृत्यु के देवता से यज्ञपूर्वक प्रार्थना करें, दोनों हाथों से यमराज दक्षिण की ओर मुख करके सम्मिलित हों। ऐसा करने से आप अपने सभी पिछले पापों से मुक्त हो जाते हैं। 

इसके बाद, भगवान यमराज के सम्मान में अपने मुख्य दरवाजे के ठीक बाहर एक अच्छी तरह से तेल से सना हुआ दीया जलाएं। नरक चतुर्दशी की शाम को, सभी देवताओं की पूजा एक दीया जलाने से पहले की जाती है, जिसे बाद में प्रवेश क्षेत्र के दोनों ओर या आपके घर के मुख्य द्वार या स्थान पर रख दिया जाता है। यह माना जाता है कि ऐसा करने से आप धन की देवी, देवी लक्ष्मी को घर पर स्वयं बुलाने और अपने साथ बहुतायत में लाने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। 

इस दिन, एक विशिष्ट समय अवधि को निशीथ काल के रूप में जाना जाता है, जहां हमारे सभी बेकार सामान को घर से बाहर फेंकने की सलाह दी जाती है। 

यह माना जाता है कि नरक चतुर्दशी के अगले दिन, दिवाली के दिन, धन की देवी लक्ष्मी आपके घर में प्रवेश करती हैं जो समृद्धि और शांति लाती हैं। नरका चतुर्दशी एक सही दिन है जो बड़ी दीवाली (दिवाली समारोह के लिए मुख्य दिन) का नेतृत्व करता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का एक और अनुस्मारक है, जैसे दशहरा, अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीकों से आनंद लिया जाता है।

गुरुवार, 24 अक्तूबर 2019

श्रीमद्-भगवत गीता से सम्बंधित प्रश्न और उत्तर

श्रीमद्-भगवत गीता से सम्बंधित प्रश्न और उनके उत्तर

"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-
से सम्बंधित प्रश्न और उत्तर 
ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई। 

ॐ . कब सुनाई? 
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।

ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।

ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी 

ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।

ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में

ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।

ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय

ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक

*ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है। 

ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने

ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को

ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में

ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।

ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद

ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना

ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85 
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.

अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद

अधूरा ज्ञान खतरना होता है।


पांडव पाँचों भाई और सौ कौरवों के नाम - Panch Pandav Aur Sau Kauravon Ke Naam

पांडव पाँचों भाई और सौ कौरवों के नाम

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -

1. युधिष्ठिर
2. भीम
3. अर्जुन
4. नकुल
5. सहदेव

( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )

यहाँ ध्यान रखें कि=>पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं  था , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।

वहीँ धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र कौरव कहलाए जिनके नाम निम्न हैं -

1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह
4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम
7. सह            8. विंद         9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान
19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र
22. चित्राक्ष     23. चारुचित्र 24. शरासन
25. दुर्मद।       26. दुर्विगाह  27. विवित्सु
28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ
31. नन्द।        32. उपनन्द   33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा    35. सुवर्मा    36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु   38. महाबाहु  39. चित्रांग
40. चित्रकुण्डल 41. भीमवेग  42. भीमबल
43. बालाकि    44. बलवर्धन 45. उग्रायुध
46. सुषेण       47. कुण्डधर  48. महोदर
49. चित्रायुध   50. निषंगी     51. पाशी
52. वृन्दारक   53. दृढ़वर्मा    54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति  56. अनूदर    57. दढ़संघ
58. जरासंघ   59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा   62. उग्रसेन     63. सेनानी
64. दुष्पराजय        65. अपराजित
66. कुण्डशायी       67. विशालाक्ष
68. दुराधर   69.  दृढ़हस्त    70. सुहस्त
71. वातवेग  72. सुवर्च    73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी   75. नागदत्त 76. उग्रशायी
77. कवचि    78. क्रथन। 79. कुण्डी
80. भीमविक्र 81. धनुर्धर  82. वीरबाहु
83. अलोलुप  84. अभय  85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय     87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी।     89. विरवि
90. चित्रकुण्डल    91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि    93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान      95. दीर्घबाहु
96. सुजात।         97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी       99. विरज
100. युयुत्सु

( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,
जिसका विवाह"जयद्रथ"से हुआ था )

जउन खेतवा में करेले किसानी भैया - jaun khetwa me karele kisani bhaiya - Kisan Andolan

जउन खेतवा में करेले किसानी भैया , उहे हवें हमरो देश के अन्नदाता भैया।  जिन बॉर्डर पर बाड़े तम्बू के छहियाँ , उ का जानिहै खेती के मरम भैया।  ख...