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सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

क्या आप जानते हैं रविवार को रविवार ही क्यों कहा जाता है

अगर आप किसी ईसाई या मुसलमान से पूछोगे कि sunday को sunday ही क्यों कहा जाता है? क्या कारण है इसका ? तो वह कुछ नहीं बता पायेगा .
इस विषय में मैं अपने पिताजी से कल पूछा . उन्होंने बताया की सूर्य जिस ग्रह की होरा में उदित होता है उस दिन वही दिन माना  जाता है .
जैसे सूर्य की होरा में सूर्योदय रविवार
चन्द्र की होरा में सूर्योदय सोमवार
मंगल की होरा में सूर्योदय मंगल वार
इसी तरह शनि की होरा में सूर्योदय शनिवार कहा जाता है

इतना प्रमाणिक है अपना सनातन धर्म .
अंग्रेजों ने हमारे भारतीय संस्कृति कां अनुसरण और नक़ल किया और हमें हीं बुद्धू बनाने लगे.
कुछ अबोध भारतीय आज भी अंग्रेजों का अनुसरण करते हैं . मेरे अक भ्रमित मित्र बोल रहा था कि, आज रविवार की रात्रि १२ बजे को दिन बदल जाएगा और सोमवार हो जाएगा . मैंने उसे उपरोक्त उद्धरण से समझाया और उसका भ्रम दूर हुआ .
आज सभी बच्चों को पढाया जाता है की धरती गोल है इसे गैलिलियो ने बताया था . लेकिन जब आप किसी ज्योतिषी से पूछोगे तो वह इस झूठे गैलिलियो के दावे को झुठ्लायेगा. क्योंकि ज्योतिषियों को सदियों पूर्व ये बात पता था
१२ राशि होती है और एक राशि ३० डिग्री की होती है . इसतरह कुल ३६० डिग्री होते हैं ये भारतीयों ज्योतिषियों को एक परंपरा से पता था . तो गैलीलियों ने किस अधिकार से धरती गोल है इस बात का पेटेंट अपने नाम करा लिया .
अन्धानुकरण करने वाले चंद भारतीय आज गैलीलियो को खगोल शास्त्र का ज्ञाता मानेंगे .
सनातन धर्म में आपके हर शंका का समाधान है सात दिन क्यों होते हैं ८ दिन क्यों नहीं . बारह महीने ही क्यों होते हैं एक साल में ? ३० दिन क्यों होते हैं एक महीने में सब कुछ बहुत प्रमाणिक है और ग्रहों की खगोलीय स्थिति से प्रभावित है किसी मनगढ़ंत गणितीय कल्पना पर नहीं है.
ईसाईयों ने अपने कैलेंडर में किसी दिन को ३० किसी को ३१ माना और एक महीने फरवरी की गणना की असुद्धि को संसोधित करने के लिए २८ या २९ दिन का माना .
इनकी लीप इयर की परिकल्पना भी अप्रासंगिक और अगणितीय है. जब ४ से पूर्णतः विभाजित हो जाने वाला साल लीप इयर हैं तो २००० और २१०० ये सताब्दी इयर लीप इयर क्यों नहीं होते ?

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