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रविवार, 19 फ़रवरी 2017

शरीर तुम्हारा अनमोल है फिर भिक्षाटन क्यों ?

एक बार एक भिखारी एक सज्जन से भीख मांगने आया. भिखारी दीन दशा बनाए उस सज्जन से क्षुधा निवारण के लिए कुछ मांग रहा था . 
उस सज्जन ने भिखारी से पूछा ? तुम भीख कयों मांगते हो ? भिखारी ने कहा मैं निर्धन हूँ इस लिए आजीविका  के लिए भिक्षाटन करता हूँ . उस सज्जन ने कहा भोले भिखारी मै देख रहा हूँ तुम बहुत धनी हो . भिखारी ने कहा कुछ भीख में दे दो साहब कयों गरीब का मजाक उड़ा रहे हो .


इसपर उस सज्जन ने कहा --> अब तुमसे मैं कुछ कीमती बस्तुएं मांग रहा हूँ .

१) सज्जन ने पूछा -तुम मुझसे १५००० रुपये ले लो और अपना बाया हाथ मुझे दे दो 
भिखारी ने कहा नहीं महाशय ये हाथ मेरे अनमोल है मैं किसी कीमत पे ये नहीं दे सकता आपको क्षमा करना जी .
२) अच्छा चलो ५०००० रुपये ले लो मुझे दोनों हाथ दे दो अपने
भिखारी -> नहीं महाशय ये कैसी याचना है ?
३) चलो हाथ नहीं दोगे तो ५०००० रुपये में अपने एक नेत्र ही मुझे दे दो 
भिखारी-> नहीं नहीं माफ़ करना जी मैं चलता हूँ 

उस सज्जन ने भिखारी को रोका और अपने यहाँ भोजन कराया . फिर उस सज्जन ने भिखारी को बताया की कोई भी व्यक्ति निर्धन नहीं है . प्रकृति प्रत्येक व्यक्ति को बहुत ही धनवान बनायीं है . आदमी भ्रम वश अपने को निर्धन मानकर दुखी हो दर दर भटकता नहीं .

अब तू तुझे पता चल गया होगा  तुम कितने धनवान हो . जाओ इस धन का सदुपयोग करो

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

सुनो सबकी करो अपने मन की



सुनो सबकी करो अपने मन की
एक बार एक आदमी अपने सिर पर बकरा लिए जा रहा था . रास्ते में बकरा ले जाते हुए तीन ठगों ने देख लिया . वो ठग उस आदमी से बकरा लेने के लिए युक्ति बनाने लगे. इसके लिए उन तीनो ठगों ने एक योजना बनायीं. सॉर्ट कट रास्ते से वो तीनों ठग उस पथिक से आगे निकल गए. कुछ किलोमीटर की अंतराल पर वे तीनों योजनाबद्थ तरीके से खड़े हो गए रास्ते में उस पथिक को देख पहला ठग उसके साथ साथ चलने लगा 
पहले ठग ने कहा .
भाई साहब ये खरगोस कितने में लिए . पथिक ने उस ठग के बात को अनसुना कर अपनी यात्रा जारी रखी . ठग पुनः पूछा खरगोस बहुत अच्छा है मुझे भी लेना था ये कितने में लिए आपने . इसपर पथिक चौक गया और अपने सिर से बकरे को उतर कर देख फिर सिर पर रख कर चलने लगा .
कुछ देर चलने के बाद पथिक को दूसरा ठग मिला वह भी पथिक के साथ साथ चलने लगा
दुसरे ठग ने पूछा
भाई साहब ये कुत्ता कितने में लिए . बड़े अच्छे नस्ल का लग रहा है . कहा मिलते हैं इस नस्ल के कुत्ते पता बतावोगे मुझे भी . इसपर पथिक को विशेष चिंता हुई वह झट से सिर पर से बकरे को पटक दिया . फिर आस्वस्त होने पर बकरे को सिर पर रख लिया और चलने लगा .
कुछ दूर जाने पर उसे तीसरा ठग मिला 
तीसरे ठग ने पूछा
इतना सुन्दर भेड़ कहा से ला रहे हो भैया . कितने में मिला ये भेड़ ?  अब इस तीसरे ठग की बात सुनकर पथिक विचलित हो गया उसे लगा मेरे सिर पर जरुर कोई मायावी राक्षस बैठा है जो बार बार रूप बदलकर कभी खरगोस कभी कुत्ता और कभी भेड़ बन जा रहा है .  निश्चय ही यह त्याज्य है इसे फ़ेंक देना चाहिय . ऐसा सोचकर उस पथिक ने उस बकरे को वहीँ फ़ेंक कर चल दिया . कुछ देर बाद वे ठग उस बकरे को ले गए .
इसीलिए विद्वानों ने कहा है सुनो सबकी करो अपने मन और बुद्धि की

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

राजा के बकरे को भर पेट कौन खिलायेगा ?


भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्ता, तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्ण. अर्थात भौतिक विषयों के भोग नहीं खत्म हुए हम मनुष्यों का जीवन ही समाप्त हो गया . तृष्णा ख़त्म नहीं हुई लेकिन विषय रसों का भोग करने वाली हमारी इन्द्रियाँ ही जीर्ण हो गयी . किसी आदमी के मुह में एक भी दांत नहीं हो लेकिन चने चबाने की तृष्णा use भी होती है . इस कहानी में एक बकरे के माध्यम से इस बात पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है. इस कहानी का पात्र रजा का एक बकरा है जिसे पेट भर खिला कर संतुष्ट कर देना है जिससे उसके सामने घास ले जाने पर वह खाने से इंकार कर दे .

कहानी कुछ इस प्रकार है . एक रजा था वह धर्म शास्त्र का ज्ञाता था . उसने अपने राज्य में एक प्रतियोगिता रखी . इस प्रतियोगिता के अनुसार राजा के बकरे को पेट भर घास खिलाकर संतुष्ट कर देना है जिससे वह सामने पड़ी घास को खाने में रूचि नहीं दिखाए . इस प्रतियोगिता को जितने वाले को यथोचित पुरस्कार दिया जायेगा.  पुरे राज्य में इस प्रतियोगित की ढोल बजाकर घोषणा कर दी गयी . राजा की घोषणा सुनकर बहुत से प्रतियोगी इस प्रतियोगिता में भाग लेने आये . प्रतिभागी बारी बारी से बकरे को लेकर चराने के लिए ले जाते और शाम को जब बकरे के साथ लौटते तो राजा उस बकरे के तृप्त होने की परीक्षा लेते . जब रहा हाथ में घास लेकर बकरे के पास जाते तो बकरा घास खाने लगता . इसप्रकार ये प्रतियोगिता पांच दिन तक चली. प्रतियोगियों के लाख प्रयास के बाद भी बकरा पूर्णतः तृप्त नहीं हुआ और परीक्षा के समय राजा के हाथ में घास देखकर उसपर मुह मार देता था.


इसी तरह सभी प्रतियोगी फेल होने लगे . इस बात की खबर एक ब्राह्मण तक पहुंची . ब्राह्मण ज्ञानी था उसने राजा के इस प्रतियोगिता का रहस्य जान लिया . अगले दिन ब्राह्मण प्रतियोगिता में भाग लेने राजा के दरबार में पहुंचा . ब्राह्मण राजा के बकरे को लेकर चराने गया और साथ में एक डंडा भी लेते गया . बकरा जब भी घास खाने के लिए मुंह आगे बढाता ब्राह्मण उसे डंडे से मारता . इस तरह बार बार डंडे की धमकी से बकरा समझ गया की घास खाना सही नहीं है . अब बकरा घास को देखकर दूसरी तरफ मुह घुमा  लेता था . सच पूछो तो बकरा तृप्त हो गया था .

ब्राह्मण बकरे को लेकर राजा के पास पहुंचा . राजा  ने या जांच करने के लिए की बकरा सचमुच तृप्त हुआ है या नहीं उसके सामने घास रखा . घास सामने देखकर बकरा दूसरी ओर मुह घुमा लिया . इस कहानी का तात्पर्य यह है की इन्द्रियां विषयों  के भोग से कभी संतुष्ट नहीं होती. यहाँ तक की इन्द्रियां भोग को भोगने में असमर्थ हो जाती है तब भी भोगों को भोगने की कामना मन में बनी रहती है . अतः इन्द्रियों पर अंकुस रखना जरुरी है

शास्त्रों ने मन इन्द्रिय और आत्मा के बारे में एक बहुत ही सटीक उदहारण प्रस्तुत किये हैं . 

इस शरीर रूपी रथ के इन्द्रिय घोड़े हैं, मन लगाम है, बुद्धि सारथि है तथा आत्मा इस रथ का रथी है .


अगर बुद्धि रूपी सारथि ने मन रूपी लगाम को ढीला किया तो इन्द्रय रूपी घोड़े इस शरीर रूपी रथ पर आरूढ़ आत्मा को गर्त में धकेल सकते हैं .        

सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

क्या आप जानते हैं रविवार को रविवार ही क्यों कहा जाता है

अगर आप किसी ईसाई या मुसलमान से पूछोगे कि sunday को sunday ही क्यों कहा जाता है? क्या कारण है इसका ? तो वह कुछ नहीं बता पायेगा .
इस विषय में मैं अपने पिताजी से कल पूछा . उन्होंने बताया की सूर्य जिस ग्रह की होरा में उदित होता है उस दिन वही दिन माना  जाता है .
जैसे सूर्य की होरा में सूर्योदय रविवार
चन्द्र की होरा में सूर्योदय सोमवार
मंगल की होरा में सूर्योदय मंगल वार
इसी तरह शनि की होरा में सूर्योदय शनिवार कहा जाता है

इतना प्रमाणिक है अपना सनातन धर्म .
अंग्रेजों ने हमारे भारतीय संस्कृति कां अनुसरण और नक़ल किया और हमें हीं बुद्धू बनाने लगे.
कुछ अबोध भारतीय आज भी अंग्रेजों का अनुसरण करते हैं . मेरे अक भ्रमित मित्र बोल रहा था कि, आज रविवार की रात्रि १२ बजे को दिन बदल जाएगा और सोमवार हो जाएगा . मैंने उसे उपरोक्त उद्धरण से समझाया और उसका भ्रम दूर हुआ .
आज सभी बच्चों को पढाया जाता है की धरती गोल है इसे गैलिलियो ने बताया था . लेकिन जब आप किसी ज्योतिषी से पूछोगे तो वह इस झूठे गैलिलियो के दावे को झुठ्लायेगा. क्योंकि ज्योतिषियों को सदियों पूर्व ये बात पता था
१२ राशि होती है और एक राशि ३० डिग्री की होती है . इसतरह कुल ३६० डिग्री होते हैं ये भारतीयों ज्योतिषियों को एक परंपरा से पता था . तो गैलीलियों ने किस अधिकार से धरती गोल है इस बात का पेटेंट अपने नाम करा लिया .
अन्धानुकरण करने वाले चंद भारतीय आज गैलीलियो को खगोल शास्त्र का ज्ञाता मानेंगे .
सनातन धर्म में आपके हर शंका का समाधान है सात दिन क्यों होते हैं ८ दिन क्यों नहीं . बारह महीने ही क्यों होते हैं एक साल में ? ३० दिन क्यों होते हैं एक महीने में सब कुछ बहुत प्रमाणिक है और ग्रहों की खगोलीय स्थिति से प्रभावित है किसी मनगढ़ंत गणितीय कल्पना पर नहीं है.
ईसाईयों ने अपने कैलेंडर में किसी दिन को ३० किसी को ३१ माना और एक महीने फरवरी की गणना की असुद्धि को संसोधित करने के लिए २८ या २९ दिन का माना .
इनकी लीप इयर की परिकल्पना भी अप्रासंगिक और अगणितीय है. जब ४ से पूर्णतः विभाजित हो जाने वाला साल लीप इयर हैं तो २००० और २१०० ये सताब्दी इयर लीप इयर क्यों नहीं होते ?

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

जब राजा ने बांध बनाकर नदी का पानी बंद कर दिया

तीन तरह का हठ प्रसिद्ध है । बाल हठ राज़ हठ और त्रिया हठ । राजा अगर कोई  बात ठान ले तो उसे पूरा कर के ही रहता है । ऐसे ही एक कहानी है जिसमे एक राजा जिद मे आकर नदी की पानी को रोक दिया था जो उसके राज से होती हुई शत्रु देश मे जाती थी ।

एक बार युवा राजा अपने मंत्री के साथ नदी किनारे टहल रहा था। नदी का किनारा बहुत मनोरम था। राजा उस स्थल की सुंदरता देख कर मंत्र मुग्ध हो गया । राजा ने अपने मंत्री से पूछा ! मंत्री जी ये नदी कहाँ जाती है ।
नदी का प्रवाह पश्चिम से पूरब की ओर था । मंत्री ने जबाब दिया । महाराज इस नदी का पानी पूरब के देश को जाता है । राजा ने मंत्री से पूछा क्या पूरब के देश का राजा मेरा मित्र है । मंत्री ने जबाब दिया महाराज इस देश से आजकल सीमा विवाद के कारण शत्रुता चल रही है । ऐसा सुनकर राजा ने मंत्री से कहा ! मेरे राज्य का पानी शत्रु के देश मे नही जायेगा ।

राजा ने अपने मंत्री को आदेश दिया आज ही शीघ्र अति शीघ्र नदी का पानी रोक दिया जाये
राजा के आदेश अनुसार मंत्री ने अधिक संख्या मे श्रमिक लगा दिये । श्रमिकों ने दोपहर से पहले नदी का पानी रोक दिया । नदी का पानी रुकने से नदी किनारे के गावं शहर मे नदी का पानी बाढ़ की स्थिति पैदा करने लगा । ग्रमीणो ने चालाक मंत्री से गुहार लगायी कि नदी का पानी न रोका जाये । मंत्री ने  ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वह इस राज हठ से अपने देश के नागरिकों को बचाने का प्रयास करेगा । साथ ही मंत्री ने ग्रामीणों से रात तक जल भराव से सावधान रहने कि सलह दी ।

राजा के दरबार मे अलार्म के लिये घंटा बजाने वाला था  जो रात मे चार बजे 4 बार घंटा बजाता था । पाँच बजे  5 बार और सात बजे 7 बार घंटा बजाता था । मंत्री ने घंटा बजाने वाले को निर्देश दिया कि तुम आज रात 12 बजे ही 7 बार घंटा बजाना ।
घंटे कि ध्वनि सूनकर राजा जग गया उसने घंटा बजाने वाले के पास जाकर उससे समय पूछा । उसने विनम्रता से कहा महाराज सुबह के 7 बजे हैं । राजा ने आश्चर्य से पूछा 7 बज गये लेकिन अभी तक सूरज नही निकला ! सेवक मंत्री को बूलावो । मंत्री से राजा ने पूछा -- अबतक सूर्योदय क्यों नही हुआ ।
मंत्री ने विनम्रता से कहा ! महाराज हमने पूरब देश वालों का पानी रोक दिया है इसलिय बदले मे उन लोगों ने सूरज को रोक लिया है ।  अब अपने देश मे कभी सूर्योदय नही होगा । राजा ने मंत्री से पूछा इसका उपाय क्या है । मंत्री ने कहा ---
यदि हम नदी का पानी उनको भी जाने दे तो हो सकता है वो भी सूरज को अपने देश मे आने दें । राजा ने आदेश दिया शीघ्र नदी पर बना बाँध तोड़ दिया जाय । रजा के आदेशानुसार मजदूर
बाँध तोड़ने मे लग गये ।कूछ घंटों बाद बाँध टूट गया । तबतक सुबह भी हो गयी थी और सूरज भी निकलने लगा था । सूरज कि लाली देख राजा अत्यंत खुश हुआ ।
इसतरह मंत्री कि चालाकी से राज हठ से मुक्ति मिली और नगरवासी डूबने से बचे

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