शनिवार, 24 दिसंबर 2016

आप दूसरे के बारे में भला सोचोंगे तो वो भी आपका भला सोचेंगे

Think Positive About Someone He Will Think Positive Too


विद्वानों  का मत है की अगर आप दूसरे के बारे में भला सोचोंगे तो वो भी आपका भला सोचेंगा। चन्दन का एक व्यापारी था। चन्दन के लकड़ियों का उसका  व्यवसाय बहुत अच्छा चल रहा था। उसने व्यापार के समृद्धि के लिए बहुत सी चन्दन लकड़ियां इकठ्ठा कर रखी  थी ताकि बाजार में बढ़ते मांग को पूरा किया जा सके। फिर बाजार में मंदी  आने से उसका व्यवसाय बिल्कुल  मंद पड़  गया। वह अपने व्यवसाय के प्रति चिंतित रहने लगा।
एक दिन राजा के यहाँ से उसका बुलावा आया। चन्दन का व्यवसायी राजा के दरबार में प्रस्तुत हुआ। व्यापारी अपने व्यवसाय से चिंतित था। राजा को देखकर उसने सोंचा ! अगर राजा की मृत्यु हो जाती है तो इनके अंतिम संस्कार के लिए मेरी चन्दन की लकड़िया बिक जाएंगी। राजा ने भी व्यापारी के तरफ ललचायी हुई नज़रों से देखा। राजा ने सोंचे इस धनी व्यापारी ने चन्दन की लकड़ियां बेचकर बहुत से पैसे कमाएं हैं। इसपर मैं यदि भारी कर लगता हूँ तो मुझे बहुत बड़ा राजस्व लाभ होगा। राजा ने व्यवसायी के प्रति ये भाव रखा और कुछ देर बातचीत के बाद उसे अतिथि विश्राम गृह में जाने को कहा। उसके पश्चात व्यवसायी अपने घर चला गया।

हमारे शरीर के अंदर जैसे भाव आते हैं हमारे आभामंडल उस अनुरूप हो जाते हैं। आभामंडल प्रत्येक व्यक्ति के शरीर के चारो तरफ एक सूक्ष्म घेरा होता है। ये आभामंडल हमारे सोच और विचार को भी प्रभावित करते हैं।
राजा भी शारीरिक संकट से जूझ रहे थे। राज पंडितों ने राजा की कुंडली देखकर कहा की महाराज आप को अच्छे स्वास्थ्य के लिए एक यज्ञ करना पड़ेगा। इस यज्ञ के लिए चन्दन की लकड़ियां और बाकी यज्ञ सामग्री तैयार करने की आज्ञा दें। यज्ञ लंबा चलना था और इसके लिए रोज चन्दन की लकड़ी चाहिए थी। 

राजा ने चन्दन की लकड़ी के लिए अपने सेवकों  को चन्दन के उसी व्यापारी के पास भेज दिया।  उन्होंने अपने सेवकों से चन्दन के व्यापारी को राजदरबार में उपस्थित होने के लिए बुला भेजा। राजा अभी अभी इस व्यापारी पर अधिक टैक्स लगाने वाले थे। लेकिन यज्ञ के लिए चन्दन की लकड़ी चाहिए थे अतः उन्होंने अपने इस फैसले को स्थगित कर दिया। राजा के सेवकों ने चंदन के व्यापारी को  राजा के यहाँ होने वाले यज्ञ के बारे में बताया। साथ ही यह भी बताया की यज्ञ लंबा चलेगा और राजा को यज्ञ के लिए महीनो शुद्ध चन्दन की लकड़ी चाहिए।

बनिए के अंदर राजा के प्रति भावना बदल गयी थी। पहले वो राजा की मृत्यु का अशुभ मना  रहा था ताकि राज  के अंतिम संस्कार के लिए उसकी चन्दन की लकड़िया बिक जाएँ। लेकिन अब वह राजा के दीर्घ जीवन की कामना करने लगा था जिससे उसकी चन्दन की लकड़िया और ज्यादा बिक सकें। इसी भाव से वह राजा के समक्ष प्रस्तुत हुआ। राजा के प्रति व्यापारी के अपने विचार बदलने से राजा भी व्यापारी के प्रति सही भाव रखने लगे थे। उन्होंने बनिए का बहुत बढ़िया आदर सत्कार किया तथा चन्दन के व्यापर पर अधिक कर लगाने की जो बात उन्होंने सोच राखी थी उसे अपने मन से निकाल दिया। राजा ने सोचा की वनिया धार्मिक कार्यों के लिए चन्दन की लकड़ी बेचता है। अगर यह अधिक कर से परेशान होगा तो हमारे राज्य में धार्मिक कार्य लोग रूचि लेकर नहीं करेंगे। धर्म में रूचि नहीं लेने से धर्म की हानि होगी, और हमारे राज्य में धर्म की हानि होने का मतलब है मेरी यानी राजा की हानि।
loading...