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पालतू कबूतर और धूर्त शिकारी - paltu kabutar aur dhurt shikari

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एक शिकारी जंगल से कबूतर पकड़ कर लाता है। उसे अपने घर पर पिंजड़े में रखता है। कबूतर धीरे धीरे पालतू बनते जाता है। शिकारी कबूतर को काजू बादाम खिलता है। कबूतर मोटा तगड़ा हो जाता है। कबूतर शिकारी के यहाँ अपने को बहुत सुखी समझता है। कबूतर जंगल में अपने पुराने मित्रों और परिवार को भूल जाता है। कबूतर शिकारी को अपना सर्वस्व समझने लगता है।


एक दिन शिकारी कबूतर को जंगल में ले जाता है। शिकारी जाल बिछाता है और उस जाल के बगल में कबूतर को पिंजड़े सहित रख देता है। अब शिकारी पास के झाडी में जाकर छुप जाता है। शिकारी वहीँ से आवाज लगता है "बोलो बेटा"। कबूतर शिकारी की आवाज सुन जोर जोर से बोलने लगता है। कबूतर की आवाज सुनकर पास के पेड़ पर बैठे कबूतर सोंचते हैं ये कबूतर मुसीबत में है इसे बचने का प्रयास करना चाहिए। ये सोचकर कुछ कबूतर पेड़ पर से उतरकर पिजड़े में बंद पालतू कबूतर के पास आते हैं और वहां बिछाए गए जाल में फँस जाते हैं।
अब धूर्त शिकारी आता है एक एक कर सभी कबूतरों को पकड़ लेता है। शिकारी सभी कबूतरों को भर ले कर आता है। अब शिकारी पालतू कबूतर को पिंजड़े में तंग देता है। फिर इस पालतू कबूतर के सामने स…

आप दूसरे के बारे में भला सोचोंगे तो वो भी आपका भला सोचेंगे

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Think Positive About Someone He Will Think Positive Too

विद्वानों  का मत है की अगर आप दूसरे के बारे में भला सोचोंगे तो वो भी आपका भला सोचेंगा। चन्दन का एक व्यापारी था। चन्दन के लकड़ियों का उसका  व्यवसाय बहुत अच्छा चल रहा था। उसने व्यापार के समृद्धि के लिए बहुत सी चन्दन लकड़ियां इकठ्ठा कर रखी  थी ताकि बाजार में बढ़ते मांग को पूरा किया जा सके। फिर बाजार में मंदी  आने से उसका व्यवसाय बिल्कुल  मंद पड़  गया। वह अपने व्यवसाय के प्रति चिंतित रहने लगा। एक दिन राजा के यहाँ से उसका बुलावा आया। चन्दन का व्यवसायी राजा के दरबार में प्रस्तुत हुआ। व्यापारी अपने व्यवसाय से चिंतित था। राजा को देखकर उसने सोंचा ! अगर राजा की मृत्यु हो जाती है तो इनके अंतिम संस्कार के लिए मेरी चन्दन की लकड़िया बिक जाएंगी। राजा ने भी व्यापारी के तरफ ललचायी हुई नज़रों से देखा। राजा ने सोंचे इस धनी व्यापारी ने चन्दन की लकड़ियां बेचकर बहुत से पैसे कमाएं हैं। इसपर मैं यदि भारी कर लगता हूँ तो मुझे बहुत बड़ा राजस्व लाभ होगा। राजा ने व्यवसायी के प्रति ये भाव रखा और कुछ देर बातचीत के बाद उसे अतिथि विश्राम गृह में जाने को क…

टोपी विक्रेता और बंदर

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एक टोपी विक्रेता था । वह गावँ शहर घूम घूम कर टोपी बेचा करता था । एक दिन वह अपने व्यापर के लिए एक गावँ में घूमकर खूब फेरी लगाया । सुबह से दोपहर हो गयी एक भी टोपी नहीं बिकी । दिन ढलने पर वह शहर की ओर जाने लगा । रास्ते में एक पेड़ की घनी छाव दिखी। उसने अपने साईकिल को पेड़ से लगाया तथा प्रचार के लिये जो टोपी पहन रखा था वही पहने सो गया ।


थके हुए टोपी विक्रेता को पेड़ की ठंढी छावं में शीघ्र ही नींद लग गयी । उस पेड़ पर कुछ बन्दर बैठे थे । बंदरों ने उस टोपी विक्रेता की तरफ बड़े गौर से देखा । फिर पेड़ पर से एक बन्दर उतरा और साईकिल की हैंडल पर रखी टोपी को उतारकर पहन लिया और पेड़ पर जा बैठा । अब उस बन्दर की देखा देखी एक एक कर सभी बन्दर उतरते और टोकरी में झलक रही टोपियों में से एक निकालते और पहन कर पेड़ पर बैठ जाते । इस तरह टोपी विक्रेता की टोकरी खाली पड़ गयी। पेड़ पर एक बन्दर बिना टोपी के रह गया था । वह बन्दर भी नीचे उतरा और फेरीवाले विक्रेता के सिर से टोपी उतार कर पहन लिया और पेड़ पर बैठ गया।

कुछ देर बाद फेरीवाला जब सर खुजलाते उठा तो उसे महसूस हुआ की उसके सर पर टोपी नहीं है। उसने साईकिल पर रखी अपनी टोपिय…

व्यवसाय के लिए धन मूल आवश्यकता नहीं - Funding is not a fundamental requirement for business

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व्यवसाय के  लिए धन मूल आवश्यकता नहीं। किसी भी व्यवसाय के लिए धन की आवश्यकता  होती है लेकिन धन से भी जरुरी है  व्यवसायिक बुद्धि। 
दो व्यवसायी आपस में बात कर रहे थे। पहले व्यवसायी का व्यापर सही चल रहा था दूसरे के पास काफी आर्थिक तंगी थी वाणिज्य में घाटे से उसके पास नए व्यवसाय के लिए पैसे नहीं थे। वह अपने मित्र से यही दुःख बार बार रो रहा था। पहला व्यापारी जो धनि था उसे व्यवसाय का अनुभव था। वह अपने मित्र से बार बार यही कहता वाणिज्य के लिए धन का होना कोई जरूरी नहीं उसके लिए तो व्यावसायिक बुद्धि ही पर्याप्त है।
निर्धनता से दुखी दूसरे मित्र को ये बात काफी अटपटी लगी वह झुंझला कर बोला। मित्र तुम कैसी अटपटी बात कर रहे हो भला बिना पैसे के रोजगार कैसे हो सकता है क्यों मेरे निर्धनता का उपहास  कर रहे हो। पहले मित्र ने उसे समझते हुए कहा मैं सच कह रहा हूँ। ये जो तुम्हारे बगल में चूहा मरा पड़ा  है न तुम इससे भी व्यवसाय कर सकते हो। 

दूसरे मित्र ने वह मृत चूहा उठाया और साप्ताहिक बाजार की ओर दोनों चल पड़े। बाजार में एक बनिया पालतू जानवर कुत्ते बिल्ली बेचता था। उसके जानवरो को खाने के लिए कुछ नहीं मिल रहा …

किसी को सही से समझने के लिए लंबा समय देना पड़ता है

एक बुद्धिमान बनिया के चार पुत्र थे। वह अपने पुत्रों को शिक्षा दे रहा था। बनिए ने अपने पुत्रों को एक दिन समझते हुए कहा की किसी भी चीज़ के बारे में हमें सही जानकारी लेने के लिए उसे लंबे समय तक देखना पड़ता है। तभी हम उसके प्रकृति और स्वभाव  के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

वणिक पुत्रों को पिता के बात पर विश्वास नहीं हुआ। एक पुत्र ने कहा की पिताजी किसी बस्तु को हम देख के कुछ छड़ों में ही इसके बारे में बता सकते है इसमें इतन समय व्यर्थ करने की क्या जरुरत है। उसके बात से बाकी दोनों भाइयों ने सहमति दिखाई। उन तीनो लड़कों ने एक साथ कहा पिता जी हम अपने दूकान में रखी बस्तु को तो शीघ्र ही पहचान जाते हैं फिर आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं।

फिर उस वणिक ने चार चार महीने के अंतराल पर अपने सभी पुत्रों को संतरे के पेड़ खोजने के लिए भेजा। उसने कहा की अपने बाग़ में संतरे का पेड़ नहीं है हम चाहते हैं की अपने बाग़ में भी संतरे के पेड़ हो

पिता की आज्ञा पाकर पहला पुत्र पेड़ की तलाश में चल पड़ा। लोगो से पूछते हुए वह संतरे के पेड़ के पास पहुँचा। उसने संतरे के पेड़ को देखा वह टेढ़ा मेढा  और सुख हुआ था। सूखे पेड़ को…