हमेशा एक बुद्धिमान व्यक्ति द्वारा सलाह लें

Always Take Advice By a Wise Man

एक कुम्हार था।  वह मिटटी के बर्तन बनाकर बेचा करता था. कुम्हार की पत्नी हमेसा उसे कोशते रहती थी। वह चाहती थी की कुम्हार ज्यादा काम करे जिससे परिवार में पैसा आये। वह कुम्हार को हमेशा दिमाग लगाकर सुन्दर कलाकृति से युक्त बर्तन बनाने को बोलते रहती थी।  लेकिन कुम्हकार जितना दिमाग लगा सकता था उसी हिसाब से साधारण बर्तन बनाया करता था।

वही दूसरे कुम्हार सुन्दर कलाकृति वाले बर्तन बना कर खूब पैसे काम रहे थे। ज्यादा पैसा होने से उनका जीवन स्तर अच्छा था। कुम्हार की पत्नी अपने सहेलियों में पहनावा और वेशभूषा से खुद को हीन समझती थी। इस हीन भावना के निवारण का एक ही उपाय था की कुम्हार भी सुन्दर बर्तन  बनाने लगे जिससे ज्यादा पैसा बन सके। 

कुम्हार भी अपने इस व्यवहार से दुखी था लेकिन मजबूर था वह दूसरे कुम्हारों की तरह कल्पनाशील नहीं था जिससे दिमाग का उपयोग कर रचनात्मक बर्तन बना सके। एक दिन कुम्हार बर्तन बनाने के लिए मिटटी लाने खेतों में गया था। खेत से मिटटी इकठ्ठा करते समय वह रोने लगा और धरती माँ से विनती करने लगा।  हे माँ!  तूने मुझे इतना मंद मति का क्यों बनाया जिससे मैं सुन्दर बर्तन बनाने में असमर्थ हूँ ? वह कार्य करते हुए धरती माँ को याद कर रोता रहा।

उसकी विनती सुन पृथ्वी को दया आ गयी। पृथ्वी एक स्त्री के रूप में कुम्हार के समक्ष प्रकट हुईं। देवी ने कुम्हार से पूछा बोलो वत्स क्यों परेशान हों मैं  तुम्हारी किस प्रकार सहायता कर सकती हूँ जिससे तुम्हारा दुःख दूर हो। कुम्हार कुछ बोल नहीं पाया। देवी ने कुम्हार को वचन दिया की तुम मुझसे कोई भी दो वरदान मांग सकते हो।
कुम्हार ने सोचा मैं तो ठहरा मतिमंद चल के अपनी पत्नी से पूछ आता हूँ, की क्या मांगना सही रहेगा। कुम्हार भागता भागता घर पहुंचा। कुम्हार की पत्नी जब कुम्हार को खाली हाथ बिना मिटटी के आये देखी तो झुंझला गयी। फिर कुम्हार ने वरदान वाली बात पत्नी को बताई।

कुम्हार पर क्रोधित पत्नी ने कुम्हार को ज्यादा दिमाग और हुनर के लिए दो सिर तथा ज्यादा काम करने के लिए दो हाथ मांगने का सलाह दिया।


पत्नी की सलाह लेकर कुम्हार खेतों की तरफ जल्दी से भाग चला। धरती के वरदान से उसे दो सर और चार हाथ हो गए। जल्दी जल्दी गधे पर सारा मिटटी लड़कर वह गावँ की ओर चल पड़ा। कुम्हार इतना खुश था की गधे के पीछे पीछे चलने वाला व्यक्ति आज गधे से काफी आगे आगे चल रहा था। कुम्हार को जल्दी घर जाकर पत्नी से अपनी सूरत और उपलब्धि जतानी थी।

गावँ की लोगों ने जब गावँ की तरफ दो सिर और चार हाथ वाले पुरुष को आते देखा तो वो लोग डर गए। गावँ वालों ने समझा की जरूर ये कोई राक्षस है। सभी ने अपने अपने हथियार निकाल लिए और एक साथ सभी गावँ वाले उसपर हमला बोल दिए। हमला  इतना अचानक था की कुम्हार संभल भी  नहीं पाया और सभी लोग उसे पीट पीट कर अधमरा बना दिए। कुम्हार के पत्नी से सुना की गाँव में राक्षस आया है तो वह भी उसे देखने पहुँच गयी। कुम्हार की पत्नी ने उसे और पीटने और मरने से बचाया। उसकी पत्नी अपने दिए परामर्श पर बहुत पश्चाताप कर रही थी।

इसीलिए कहा गया है=>कभी भी कोई परामर्श बुद्धिमान और सज्जन व्यक्ति से लेनी चाहिए।     

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