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सोमवार, 3 अक्तूबर 2016

किसान और खच्चर की कहानी, विपरीत परिस्थिति को अपने अनुकूल बनायें

Story of Farmar and Mule - विपरीत परिस्थिति को अपने अनुकूल बनायें

यह कहानी एक किसान की है जो एक पुराना खच्चर पाल रखा था।  एक दिन खच्चर किसान के कुएं में गिर गया। किसान खच्चर को प्रार्थना करते सुना अर्थात खच्चर कुआँ में गिरने पर जो कुछ भी कर सकता था अपनी भाषा में वो किया।
सावधानी से स्थिति का आकलन करने के बाद, किसान खच्चर के साथ सहानुभूति प्रकट किया। लेकिन फैसला किया कि न तो खच्चर बचाने की स्थिति में है और न ही कुआँ इतना बड़ा है की उसमे घुस कर वो खच्चर को निकल सके।  इसके बावजूद, वह अपने पड़ोसियों को बुलाया और उन्हें बताया कि खच्चर के साथ क्या हुआ है। वह उनसे बूढ़े खच्चर को कुएं में ही दफ़न करने का परामर्श किया जिससे खच्चर दुःख से निजात  पा सके।
शुरू में बूढ़ा खच्चर लाचार हो गया था! लेकिन जैसे ही किसान और  उसके पडोसी  उसके पीठ के ऊपर दफ़न करने के लिए मिट्टी डालने लगे, उसके मन में एक विचार आया। अचानक उसे याद आया की जब किसान उसके पीठ पर जब मिटटी लोड करता था तो वह अपनी पीठ हिला कर मिटटी गिरा कर खड़ा हो जाया करता था।

खच्चर अपनी पुरानी आदत जारी रखा। उसके पीठ पर किसान और उसके पडोसी मिटटी का ढेर डालते वह अपना शरीर हिलाकर सारी मिटटी गिरा देता था और और मिटटी के ऊपर एक कदम आगे चल देता था। उसने अपने आप को प्रोत्साहित करने के लिए बार बार यही दोहराया। इस बात की परवाह किये बिना की कैसे दर्दनाक और चिंताजनक स्थिति में वह है। बूढ़ा खच्चर पीठ से मिटटी हिलाकर गिराना और उसके ऊपर कदम रख कर ऊपर आने का प्रयास जारी रखा। 

किसान और उसके पड़ोसियों के द्वारा खच्चर को  दफ़नाने का प्रयास उसके लिए कुएं से बहार निकलने में मददगार साबित हुआ।  धीरे धीरे इसी तरह कुएं में मिटटी भरती गयी और अंत में खच्चर उछाल कर कुएं से बहार निकल गया। यह इसलिए सम्भव हुआ क्योंकि खच्चर ने अपने विपरीत परिस्थितियों की सही तरीके से संभाला।

यही ज़िन्दगी है! अगर हम अपनी समस्याओं का सामना करतें हैं और उन्हें सकारात्मक रूप देतें हैं , संकट की स्थिति को गभीर समस्या और किसी के दया की पात्र नहीं बनाने देते। तो असफलता और संकट की स्थिति भी हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकती।

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