ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है, बेईमान ग्वाला

एक दूधवाला बेईमानी का सहारा लेकर बहुत अमीर बन गया। उसे शहर जाने के लिए रोज रास्ते में एक नदी  पार करनी पड़ती थी। शहर में उसके ग्राहक रहते थे और वह रोज शहर जाकर अपने ग्राहकों को दूध देता था। नदी पार करने के लिए वह रोज अपने दूध के बर्तन के साथ नाव पर बैठ जाता था। नदी पार करते हुए वह दूध के बर्तन का मुह खोल कर दूध में पानी मिला लेता था। लाभ कमाने के लिए वह रोज इसी तरह दूध में पानी मिला देता था और ऐसा करके वह अच्छा लाभ कमाने लगा। एक दिन वह अपने बेटे के शादी का जश्न मानाने के लिए ग्राहकों से देय राशि वसूलने के लिए वह शहर गया।

इस प्रकार एकत्र बड़ी राशि से , वह सुन्दर कपड़े और शानदार सोने के गहने खरीदा।  अपने घर जाते समय जब वह नदी पर कर रहा था थो नाव नदी में डूब गयी। दूधवाला तैरना जनता था वह तैर कर नदी के किनारे पहुँच गया लेकिन उसके सभी कीमती कपडे नदी के तेज धार में बह गए। शानदार चमकते सोने के गहने नदी में डूब गए और वह चाह कर भी उन्हें नहीं बचा सका। दूध विक्रेता के दु:ख से अवाक था। उस समय वह नदी से एक आवाज सुना, "मत रोवो जो तुमने खोया है वह तुम्हारे ग्राहकों से अवैध रूप से कमाया हुआ लाभ ही है" तुम रोज अपने ग्राहकों के दूध में लाभ के लिए पानी मिलाया करते थे। आज पानी का पैसा पानी में मिल गया है इससे तुम दुखी क्यों हो रहे हो।  

कम्मेंट बॉक्स में इस कहानी का मोरल सुझाएँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ईमानदार लकड़हारा

भक्त की निश्छलता - Guileless Devotee

Guilty Mind is Always Suspicious - Chor ki Dadhi me Tinka