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October, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राजू नाम का लड़का और धनी सेठ

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राजू नाम लड़का एक धनी सेठ के यह काम करता था। लड़का बहुत मातृ भक्त था। वह अपने माँ से पूछ कर ही सब काम करता था। वह किसी बात के निर्णय के लिए अपने बुद्धि का प्रयोग नहीं करता था। अर्थात  उसमे प्रतिउत्पन्न मतित्व की कमी थी।

एक बार सेठ ने लड़के को मजदूरी में पैसे दिए। राजू पैसे हाथ में लिए सिक्कों को उछालते हुए घर पहुँचा। उछालने से बहुत से सिक्के रास्त में खो गए।  बच्चे खुचे सिक्कों के साथ घर पहुँचा तो माँ ने राजू से उदासी का कारन पूछा।  राजू ने बताया की सेठ ने मुझे दस सिक्के दिए थे लेकिन कुछ सिक्के रास्ते में गिर गए। माँ ने उसे समझते हुए कहा कोई बात नहीं बेटा अब सेठ कोई भी चीज दे तो उसे जेब में रख कर लाना।
कुछ दिन बाद सेठ की गाय ने बछड़े को जन्म दिया। सेठ ने राजू को कहा की आज तुम गाय का दूध लेते जाना। राजू ने माँ के कहे अनुसार दूध जेब में रख लिया। जेब में दूध रखने से सारा दूध निचे गिर गया। उदास होकर राजू जब घर पहुँचा तो माँ ने उसे समझते हुए कहा कोई बात नहीं बेटा अब से तुम जो कोई सामान लाना बाल्टी में लाना। मैं तुम्हे ये बाल्टी देती हूँ इसे अपने साथ ले जाना सेठ जब भी कोई सामान दे इसमें रख ल…

ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है, बेईमान ग्वाला

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एक दूधवाला बेईमानी का सहारा लेकर बहुत अमीर बन गया। उसे शहर जाने के लिए रोज रास्ते में एक नदी  पार करनी पड़ती थी। शहर में उसके ग्राहक रहते थे और वह रोज शहर जाकर अपने ग्राहकों को दूध देता था। नदी पार करने के लिए वह रोज अपने दूध के बर्तन के साथ नाव पर बैठ जाता था। नदी पार करते हुए वह दूध के बर्तन का मुह खोल कर दूध में पानी मिला लेता था। लाभ कमाने के लिए वह रोज इसी तरह दूध में पानी मिला देता था और ऐसा करके वह अच्छा लाभ कमाने लगा। एक दिन वह अपने बेटे के शादी का जश्न मानाने के लिए ग्राहकों से देय राशि वसूलने के लिए वह शहर गया।

इस प्रकार एकत्र बड़ी राशि से , वह सुन्दर कपड़े और शानदार सोने के गहने खरीदा।  अपने घर जाते समय जब वह नदी पर कर रहा था थो नाव नदी में डूब गयी। दूधवाला तैरना जनता था वह तैर कर नदी के किनारे पहुँच गया लेकिन उसके सभी कीमती कपडे नदी के तेज धार में बह गए। शानदार चमकते सोने के गहने नदी में डूब गए और वह चाह कर भी उन्हें नहीं बचा सका। दूध विक्रेता के दु:ख से अवाक था। उस समय वह नदी से एक आवाज सुना, "मत रोवो जो तुमने खोया है वह तुम्हारे ग्राहकों से अवैध रूप से कमाया हुआ लाभ…

धनतेरस की कहानी - धनत्रयोदशी २०१६ २८ अक्टूबर शुक्रवार

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धनतेरस धनत्रयोदशी पांच दिन तक चलने वाले दिवाली उत्सव का पहला दिन है। इस त्यौहार को धनत्रयोदशी या धनवन्तरि त्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। यह हिन्दू पंचांग( "calender") के कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष (२०१६) को धनतेरस  का त्यौहार २८ अक्टूबर दिन शुक्रवार  को है।

धनतेरस के अवसर पर धनवन्तरि की पूजा की जाती है।  धनवंतरी को सभी चिकित्सकों का शिक्षक और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है।

इस उत्सव की विशेषता ->

धनतेरस धन के साथ जुड़ गया है और लोग इस दिन सोने या चांदी के गहने और बर्तन आदि खरीदते है,  हालांकि धनवन्तरि का धन और सोने का साथ कोई सम्बन्ध नहीं है। धन्वंतरी धन के बजाय एक अच्छे स्वास्थ्य के प्रदाता है। 

धनतेरस से सम्बंधित कहानी 

इस बारे में एक प्राचीन कथा में राजा हिमा के 16 वर्षीय बेटे के एक दिलचस्प कहानी  का वर्णन है। उसकी कुंडली ने शादी के चौथे दिन सांप के काटने से उसकी मौत की भविष्यवाणी की। उस विशेष दिन पर, उसकी नवविवाहिता  पत्नी ने उसे सोने के लिए अनुमति नहीं दी। एक ढेर में वह अपने सारे गहने और सोने और चांदी के सिक्कों को श…

प्रतिक्रिया जीवन की कसौटी - प्रतिक्रिया में व्यक्तिगत भिन्नता

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प्रतिक्रिया जीवन की कसौटी
प्रतिक्रिया जीवन की कसौटी है। एक ही बात का विभिन्न व्यक्तियों पर पात्रता के आधार पर भिन्न प्रतिक्रिया होती है। इस कहानी में तीन पात्र हैं जिनपे एक ही बात का अलग अलग असर हुआ है।

पुराने समय में राजा बलदेव  राय  राजा राज करते थे। वो बहुत ज्ञानी , न्याय प्रिय और समाज शास्त्री भी थे। व्यक्ति  के स्वभाव को वो देख कर ही पहचान लेते थे। उनके नयन करने की प्रक्रिया बहुत निराली थी। एक बार राजा के दरबार में चार चोर पकड़ कर लाये गए। चारों  का अपराध था चोरी। अलग अलग जगहों पर चारो व्यक्तियों पर चोरी का आरोप था। राजा के सिपाही इन अभियुक्तों  को दरबार में पेश  किया थे। अपराध सिद्ध होने पर इनको सजा मिलनी थी या आरोप झूठ साबित होने पर ये चारो मुक्त हो सकते थे।


राजा के समक्ष जब एक एक कर इन चारों अभियुक्तों को पेश किया गया तो राजा ने इन सभी को अलग सजा सुनाया जबकि अपराध सबका सामान था। यह देख कर सभी दरबारी चकित थे।

१) पहले अभियुक्त को राजा ने सजा सुनाई ने के क्रम में सिर्फ इतना कहा , तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए " वह अभियुक्त चला गया

२) दूसरे अभियुक्त को राजा के समकक्ष पेश किया गय…

सत्य का बोध व्यक्ति के सामर्थ्य पर निर्भर है

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सत्य का बोध व्यक्ति के सामर्थ्य पर निर्भर है

भारत में प्राचीन काल में शिक्षा व्यवस्था बहुत ही सरल और सर्व सुलभ थी। कोई निर्धन व्यक्ति धनाभाव के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहा। छात्र गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे। भिक्षाटन से आश्रम कर खर्च चलता था।  एक दिन गुरु जी सत्य और असत्य के सन्दर्भ में छात्रों को शिक्षा दे रहे थे। गुरु जी ने छात्रों को बताया की सत्य का बोध व्यक्ति के सामर्थ्य पर निर्भर करता है। गुरु जी के मुख से ऐसा सुन कर कुछ छात्रों को आश्चर्य हुआ की यह  कैसे हो सकता है।

गुरु जी नई फिर समझाते हुए कहा कि सत्य ही ईश्वर है और सत्य बहुत बड़ा तथा व्यापक है। सत्य के बोध के लिए सत्य के व्यापक स्वरुप को जिसने अनुभव नहीं किया वह सत्य के यथार्थ को नहीं जान सकता।  छात्रों का संशय अब भी नहीं दूर हुआ।


गुरु जी अब सभी छात्रों को हथिसार में ले गए जहा एक हाथी बंधा था। अब गुरु जी ने चार छात्रों को चुना जिन्हें ज्यादा संशय था, और उनके आँख बंधवा दिए। अब एक एक छात्र से हाथी के शरीर के एक एक भाग का स्पर्श कराया गया। और उनसे पूछा गया कि यह कौन सी वस्तु है।

१) पहले छात्र को हाथी का पू…

किसान और तरबूज की कहानी

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एक छोटे से गाँव में एक बहुत ही मेहनती किसान रहता था। एक बार उसने अपने खेत में एक विशाल तरबूज उगाई। किसान अपने तरबूज का बहुत गर्व था और वह जानता था कि, यह सबसे बड़ी तरबूज जो कभी किसी ने देखा होगा। वह टकटकी लगाए अपने तरबूज की रखवाली किया करता था और उसके बारे में सोचा करता था की इस अद्भुत फल का क्या करना है।

पहले उसने सोचा कि इसे बाजार में बेच देना चाहिए, यह उसे अच्छा लाभ देगा। लेकिन फिर उसने सोचा की क्यों न इस तरबूजे को प्रदर्शनी में रखा जाए। वह इसी तरह उधेड़ बन में लगा रहा और अंत में निर्णय किया कि क्यों न इसे राजा को उपहार स्वरुप भेंट कर दूँ। किसान इसी अच्छी सोच के साथ सो गया कि वह राजा को अद्भुत तरबूज भेंट करेगा और बदले में राजा से इनाम पायेगा।
उस राज्य का राजा बहुत दयालु था और प्रजा की देखभाल करता था अतः उसे इसी बहाने अपने राज्य मे टहलने की आदत थी। वह आम आदमी के वेश में अपने नागरिकों को देखने निकल जाता था यह सुनिश्चित करने की सभी सुरक्षित थे हैं। उस रात, राजा एक साधारण आदमी के भेष में किसान के घर से होकर गुजरा। वहां राजा ने एक बड़ा तरबूज देखा और वह इसपर इतना मोहित हो गया…

धूर्त और कंजूस सियार

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दूसरे का बंधन खोलने के लिए खुद बंधन मुक्त होना जरुरी

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भागवत के कथा के बारे में हम सभी जानते हैं कि ध्यान पूर्वक इसका श्रवण करने से व्यक्ति मुक्त हो जाता है। उस व्यक्ति को परम पद मोक्ष की प्राप्ति होती है। एक बार एक भागवत कथा वाचक अपने शिष्य को कथा सुना रहे थे। कथा सुनाने के पश्चात स्रोता को वह लाभ नहीं मिला जो परीक्षित को मिला था। स्रोता को अभी भी संसार के विषय बंधन में जकड़े हुए थे। स्रोता ने अपने कथा वाचक गुरु से इसका कारण पूछा।
गुरु भी इसका रहस्य नहीं जान पाए अतः उन्होंने अपने गुरु जी के पास इस समस्या का समाधान जानने के लिए जाने का निश्चय किया। भागवत कथा वाचक अपने शिष्य के साथ गुरु आश्रम में पहुंचे। वहाँ पहुँच कर कथा वाचक गुरु ने अपने गुरु को सादर प्रणाम किया, और भागवत के कथा सुनने से शिष्य को कोई लाभ नहीं होने का कारण पूछा।

गुरु जी ने इन दोनों अतिथियों का यथोचित सत्कार किया। उसके उपरांत अपने शिष्यों से कहकर दोनों के के हाथ पैर बंधवा दिए। अब गुरु से कहा गया की आपका शिष्य बंधन में है इसका बंधन खोलिये। इसपर कथा वाचक गुरु ने कहा मैं तो खुद बंधन में हुए मैं कैसे वंधन खोल सकता हूँ। भागवत कथा वाचक गुरु के शंका का समाधान हो गया था। गुरु ने…

क्यों किया जा रहा रावण को महिमामंडित

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रावण का महिमामंडन क्यों  रावण एक खलनायक था। रामायण की पूरी कथा में राम को नायक और रावण को खलनायक बताया गया है। आजकल कुछ लोग रावण को  महिमामंडित करने में लगे हैं। ये बामपंथी सोच सनातन धर्म के लिए बहुत चिंता का विषय है। सनातन धर्म को छति  पहुँचाने के लिए विधर्मियों ने बहुत गहरी साजिस चली है। जरा सोचिये अब तक खलचरित्र के रूप में कुख्यात रावण को अब महिमंडित क्यों किये जा रहा है।

कई कुत्सित मानसिकता वाले लोग आजकल रावण को माहज्ञानी, महापंडित, कुल का गौरव बढ़ने वाला और देश भक्त बताते हैं। अगर हम किसी खलनायक को महिमामंडित कर रहे हैं तो कही न कही हम राम के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। रावण की बड़ाई में निकला  आप  के मुख से एक स्वर राम के प्रति आपकी निष्ठा को काम कर देता है। 

आइये  रावण से सम्बंधित कुछ  प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालते हैं- >

१) रावण महाज्ञानी नहीं अज्ञानी था ->
रावण को महाज्ञानी मानाने वाले लोग  ये भूल जाते हैं कि ज्ञान की परिभाषा क्या है ? ज्ञान शुभ कर्म करने की प्रेरणा  देता है। अगर आप शुभ कर्म नहीं कर रहे तो आप निश्चित ही अज्ञानी है। राक्षस स्वभाव वश रावण के शुभ  कर्म …

आप सुधरे तो जग सुधरा - राजा ग्वालों और दूध की कहानी

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एक राजा था।  वह बहुत न्यायप्रिय था। एक बार राजा के मन में यह जानने की इच्छा  हुई की उसके नगर में कुल कितने ग्वाले हैं और यज्ञादि के लिए जरुरत पड़ने पर अधिक से अधिक कितना दूध और दधि घृतादि उपलब्ध हो सकते हैं।
यह जानने के लिए राजा ने अपने महल के बगीचे में एक बहुत बड़ा कड़ाह रखवा दिया। नगर में रहने वाले ग्वालों को आदेश दिया गया की सभी ग्वाले रात में अपने अपने घर से दूध का भरा बर्तन लाकर इस कड़ाह में उड़ेलेंगे। बगीचे में बिना पहरेदार के मुक्त रूप से ग्वाले जाकर अपने दूध कड़ाह में डाल सकते थे।

सभी ग्वालों को उपस्थिति निश्चित करने के लिए बगीचे के बाहर गेट पर रौशनी में एक रजिस्टर रखा था। सभी ग्वालों को अपनी उपस्थिति इसी पुस्तिका में दर्ज करनी थी। कड़ाह ढंका हुआ था और कड़ाह में दूध डालने के लिए एक नाली बानी हुई थी। कड़ाह में कितना दूध है भरा है या खाली यह किसी ग्वाले को नहीं दीखता था।   रात होते ही सभी ग्वाले अपने अपने दूध के बर्तन लेकर राजा के बगीचे की ओर चल पड़े। एक ग्वाले ने अपने मन में विचार किया राजा ने सभी से दूध डालने को कहा है मैं अगर अपने हिस्से के दूध  के बदले पानी ही डाल दूँ तो कौन देखने ज…

एक अंधी लड़की की कहानी

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Story of a Blind Girl
एक अंधी लड़की थी जो खुद से नफरत करती थी सिर्फ इसलिए कि वह अंधी थी। वह अपने प्रेमी को छोड़कर, हर किसी से नफरत करती थी। वह उसके मदद के लिए हमेशा तैयार रहता था। उस लड़की ने कहा कि अगर वह केवल दुनिया देख सकती, तो वह अपने प्रेमी से शादी कर लेती।
एक दिन, कोई उसे एक जोड़ी आँखें दान किया अब वह अपने प्रेमी के साथ साथ सब कुछ देख सकती थी। उसके प्रेमी ने उससे पूछा, "अब तुम दुनिया को देख सकती हो , क्या अब तुम मुझसे शादी करोगी?"  लड़की चौक गयी जब उसने देखा की उसका प्रेमी भी अँधा है और उसने शादी करने से इंकार कर दिया। उसका प्रेमी आँसू भरी आँखों से उससे दूर चला गया, और उसे एक चिट्ठी के माध्यम से सन्देश  भेजा।
"प्यारी बस मेरी आँखों का ख्याल रखना।"
यहाँ बताया गया है कि कैसे मनुष्य की स्थिति में बदलाव आने से उसके निर्णय में परिवर्तन आ जाता है और उसके विचार बदल जाते हैं। बहुत काम लोगों को याद रहता है की  पहले जीवन कैसा था, और जीवन की उस विषम परिस्थितियों में किन लोगों ने मेरा साथ दिया ?
जीवन एक उपहार है आज एक निर्दयी वचन बोलने से पहले आप इस बारे में सोचें कि -कोई…

किसान और खच्चर की कहानी, विपरीत परिस्थिति को अपने अनुकूल बनायें

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Story of Farmar and Mule - विपरीत परिस्थिति को अपने अनुकूल बनायें यह कहानी एक किसान की है जो एक पुराना खच्चर पाल रखा था।  एक दिन खच्चर किसान के कुएं में गिर गया। किसान खच्चर को प्रार्थना करते सुना अर्थात खच्चर कुआँ में गिरने पर जो कुछ भी कर सकता था अपनी भाषा में वो किया। सावधानी से स्थिति का आकलन करने के बाद, किसान खच्चर के साथ सहानुभूति प्रकट किया। लेकिन फैसला किया कि न तो खच्चर बचाने की स्थिति में है और न ही कुआँ इतना बड़ा है की उसमे घुस कर वो खच्चर को निकल सके।  इसके बावजूद, वह अपने पड़ोसियों को बुलाया और उन्हें बताया कि खच्चर के साथ क्या हुआ है। वह उनसे बूढ़े खच्चर को कुएं में ही दफ़न करने का परामर्श किया जिससे खच्चर दुःख से निजात  पा सके। शुरू में बूढ़ा खच्चर लाचार हो गया था! लेकिन जैसे ही किसान और  उसके पडोसी  उसके पीठ के ऊपर दफ़न करने के लिए मिट्टी डालने लगे, उसके मन में एक विचार आया। अचानक उसे याद आया की जब किसान उसके पीठ पर जब मिटटी लोड करता था तो वह अपनी पीठ हिला कर मिटटी गिरा कर खड़ा हो जाया करता था।

खच्चर अपनी पुरानी आदत जारी रखा। उसके पीठ पर किसान और उसके पडोसी मिटटी का ढेर …

गरीब लोग कैसे रहते हैं

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एक दिन, एक बहुत धनी परिवार के एक पिता ने अपने बेटे को गरीब लोग कैसे रहते हैं यह दिखाने के उद्देश्य से फार्म की यात्रा पर जाते हुए अपने साथ ले लिया। वे अपने फार्म पर कई दिन और रात बिताये  यह जानने के उद्देश्य से की कैसे  कोई परिवार बहुत गरीब परिवार के रूप में जाना जायेगा ? उनकी यात्रा से वापसी पर, पिता ने अपने बेटे से पूछा, "कैसे यात्रा थी?"

"यह बहुत अच्छा था, पिताजी।" पुत्र ने जबाब दिया।

पिता ने पूछा। "क्या तुमने देखा कि गरीब लोग कैसे रहते हैं?"

बेटे ने कहा "ओह, हाँ," ।

पिता ने पूछा "तो, मुझे बताओ, तुमने यात्रा से क्या सीखा?"


बेटे ने उत्तर दिया, "मैंने देखा है कि हमारे पास एक कुत्ता है और उनके पास चार हैं। हमारे पास एक तालाब है जो बगीचे के मध्य तक जाती है और उनके पास एक खाड़ी है जिसकी कोई सीमा नहीं है। हम अपने बगीचे में रौशनी के लिए अपना लालटेन लेके आये हैं, और वे रात में सितारों की प्रकाश से प्रकाशित होकर आनंदित हो रहे है। हमारे आँगन की सीमा , सामने यार्ड तक पहुंचती है, और पूरा क्षितिज उनका आँगन है। हमारे पास रहने के लिए जमीन क…