Shikari Hans aur Dusht Kauwa

एक बार की बात है़.एक शिकारी जंगल मे शिकार करने गया था. दिन भर शिकार के पीछे दुर दुर तक भागने के बाद भी वह उस दीन कोई शिकार नही कर सका. मृगया के स्रम से थककर वह एक पेड़ के नीचे लेटकर विस्राम करने लगा. आखेट से थके हुए व्याध को शीघ्र ही नींद लग गयी.
 कुछ देर बाद शिकारी के मुह पर धुप पड़ने लगा. उस पेड़ पर एक हंस बैठा था.हंस ने सोचा शरीर पर धुप पड़ने से शिकारी की नींद टुट जाएगी.अतः ओ अपना पंख फैलाकर छॉव कर दिया. धुप से परेशान शिकारी जो बार बार करवट बदल रहा था अब आराम से सोने लगा. 



कुछ देर बाद एक कौआ उड़ता हुआ आया और उसी पेड़ पर बैठ गया. कौए ने देखा की एक हंस पंख फैलाए बैठा है.उसने इसका कारण जानना चाहा. नीचे देखा तो पता चला हंस जी शिकारी के परोपकार मे लगे हैं. दुष्ट केजरीवाल रूपी कौए को हंस के इस स्वभाव से ईष्यॉ हो गयी. कौए ने अपनी दुष्टता दिखायी. वह हंस की नीचे वाली डाली पर बैठकर शिकारी के मुहपर मल विस्रजीत कर दिया और उड़कर भाग गया.
 शिकारी चौककर उठा .वह धनुष पर बाण चढाये सोया था. अपने उपर दृष्टी डाली तो पंख फैलाए एक हंस बैठा दिखा.शीघ्रता से निशाना साधकर ओ हंस के उपर छोड़ दिया.इस तरह दुष्ट कौए के कारण निःदोष हंस की जान चली गयी.

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