भक्त की निश्छलता - Guileless Devotee


भक्त की निश्छलता
एक बहुत ही भोला व्यक्ति था. शारीरिक कष्ट और गरीबी से परेशान था। उसे किसी व्यक्ति ने सलाह दिया कि तुम भगवान की पूजा क्यों नहीं करते।  भगवान प्रसन्न होंगे तो तुम्हारे सारे कष्ट और निर्धनता दूर  हो जाएगी। लोगों की परामर्श पर वो भगवान विष्णु की आराधना करने लगा।
वह बहुत प्रेम से भगवान के लिए सुबह उठ कर फूल  चुनता और विष्णु मंदिर जाकर भगवान का श्रद्धा सुमन अर्पित करता। भगवान की स्तुति कर उनसे अपने रोग क्लेश और दरिद्रता को दूर  करने का अनुरोध करता। एक महीने हो गए उसको भगवन विष्णु के पूजा करते हुए और मंदिर जाते हुए लेकिन उसके कष्ट दूर नहीं हुए।
एक दिन भगवान की मंदिर से आते हुए रास्ते में उसे एक दूसरा भक्त मिला जो भगवन शिव की पूजा करके शिव मंदिर से लौट था। विष्णु भक्त ने शिव भक्त से समाचार पूछा और अपनी  व्यथा सुनाई। विष्णु भक्त भोला भाई मई एक महीने से भगवन विष्णु की पूजा कर रहा हूँ लेकिन कुछ लाभ नहीं मिला।  मेरे संकट और क्लेश पूर्ववत सात रहे हैं। शिव भक्त ने उससे भगवन शिव की आराधना करने को कहा। शिव भक्त ने कहा की भगवन शिव आशुतोष है वो हमारी जल्दी सुनते हैं। भगवन शिव धरती पर रहते हैं धरती के देवता हैं संपर्क साधना आसान है शिव से। भगवान विष्णु तो वैकुंठ धाम रहते है लोकल कॉल भी नहीं लगती वहाँ STD लगती है।   
शिव भक्त की बात से सहमत होकर भोला भक्त दूसरे दिन शिव मंदिर पहुँचा। शिव  मंदिर पहुँच कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और अगरबत्ती जलने के लिए आग प्रज्वलित किया। 


अचानक उसका ध्यान शिव मंदिर में रखे विष्णु के एक छोटी सी प्रतिमा पर गया। भगवान विष्णु के व्यवहार से यह भक्त रुष्ट था।  वो नहीं चाहता था की शिव को खुश करने के लिए दिखाए जा रहे अगरबत्ती की सुगंध विष्णु सूंघ ले। इसको रोकने के लिए वो दिया के बाती से रुई निकल कर विष्णु प्रतिमा की नाक में डालने ही वाला था की मूर्ति बोल पड़ी। भगवान विष्णु भक्त की निश्छलता से प्रसन्न हो गए। भगवान ने कहा कितना भोला भक्त है इसकी आस्था देखो मेरे उपस्थिति में इसको कितना विश्वास है। भगवन विष्णु ने प्रकट होकर उस भक्त को दर्शन दिए और उसके सारे कष्ट दूर हो गए।   

सारांश :-> भगवान में सच्ची आस्था पूजा को सार्थक बनाती है।

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