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September, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पुनर्मूषिको भव- Phir se Chuha ho Jawo

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पुनर्मूषिको भव

पुनर्मूषिको भव ->यह कथा बहुत महत्वपूर्ण और शिक्षाप्रद है। यह कहानी एक कृतघ्न चूहे के प्रति है जो ऋषि के आशीर्वाद से बाघ बन गया और फिर ऋषि पर आक्रमण करने से ऋषि ने शाप देकर उसे फिर चूहा बना दिया।  इस कहानी से हमें कृतज्ञता की शिक्षा मिलती है।

एक बार जंगल में आश्रम बनाकर एक ऋषि रहते थे।  ऋषि की कुटिया के आस पास काफी पवित्र वातावरण था। ऋषि के प्रभाव से सारे जीव वहां  निर्भय होकर रहते थे। एक दिन ऋषि पूजा के आसान पर बैठे थे तभी एक चूहा उनकी गोद में आकर गिर पड़ा। चूहा भयभीत था उसे किसी बिल्ली ने मारकर खाने के लिए पीछा किया था।

ऋषि ने चूहा  को दुखी देखा तो सोचा अगर इसी बिल्ली से भय है तो ये भी बिल्ली हो जाए। ऋषि ने उस चूहे को भी बिल्ली बना दिया। अब उस बिल्ली बने चूहे को बिल्ली से भय नहीं रही. आश्रम के इर्द गिर्द सुखपूर्वक विचरण करता  .

एक दिन किसी कुत्ते ने उस बिल्ली का पीछा किया।  बिल्ली भागते भागते ऋषि के शरण में आयी। ऋषि ने उससे परेशानी का कारण पूछा।  बिल्ली ने कहा की  कुत्ते मुझे डराते हैं।

ऋषि ने कहा "स्वानः त्वाम विभेति! त्वमपि स्वानोभाव " अर्थात कुत्ता तु…

राजा भोज और लकड़हारा

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राजा भोज भारत  के ऐसे प्रसिद्ध राजा हुए।  जिनका नाम हर किसी के जिह्वाग्र पर रहता है। लोग बात बात पर राजा भोज की उपमा दिया करते हैं। एक लोकोक्ति "कहा राजा भोज कहाँ गंगा तेली " तो इतना लोकप्रिय है कि  अक्सर लोग इसका प्रयोग करते देखे जाते हैं।
राजा भोज धार नगरी के राजा थे।  उनके राज्य में कला साहित्य और संगीत को बहुत प्रश्रय मिला। विद्वानों का आदर करना और उनको सम्मानित करना राजा भोज को बहुत अच्छा लगता था। उनके राज्य में संस्कृत भाषा का बहुत उत्कर्ष हुआ। आम नागरिक भी शुद्ध संस्कृत बोलता था।

एक बार राजा भोज भ्रमण करने निकले थे।  रास्ते में उन्हें एक लकड़ी का भोज सिर  पर रख कर लाते हुए एक <a href="http://storiesformoralvalues.blogspot.in/2016/06/honesty-the-best-policy.html?m=1">लकड़हारा</a> दिखाई दिया। लकड़ी का भोज ज्यादा देख कर राजा भोज ने लकड़हारे से पूछा।  "भारो  वाधति"? अर्थात लकड़ी का भार ज्यादा कष्ट तो नहीं पहुँचा  रहा ?


लकड़हारे ने जबाव दिया
"भारो न वाधते  राजन यथा वाधते  वाधति" अर्थात हे राजन सिर पर लकड़ी के भार  से मुझे इतना कष्ट न…

ब्राम्हण सुनार और महाकवि कालिदास

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Brahman Sunar aur Mahakavi Kaali Daas  राजा भोज बड़े न्यायप्रिय थे । उनके राज मे कठिन व जटिल आपराधिक  विवादों का सही न्याय होता था । आपराधी चाहे जितनी चालकी से अपराध कर साक्ष्य मिटाना चाहे राजा भोज के न्याय प्रक्रिया से बचना  मुश्किल था । उनके राज्य के दो ग्रामीण  धन अर्जन करने विदेश यात्रा  पर गये । उन दोनो मे से एक ब्राम्हण था तथा दुसरा सुनार(स्वर्णकार ) था । दोनों  विदेश  मे परिश्रम कर  के धन कमाये । ब्राम्हण की पंडिताई खुब चली और वह खुब पैसा  कमाया ।सुनार के सोने चाँदी का व्यवसाय भी खुब चला । लेकिन ब्राम्हण की कमाई सुनार  की कमाई से कई गुना  ज्यादा  थी । सुनार को ब्राम्हण की कमाई देख के  जलन होते रहती थी।  लेकिन धूर्त सुनार अपने ईर्ष्या को ब्राम्हण के सामने प्रकट नहीं होने देता था। बहुत दिनों बाद दोनों ने  अपने गावँ जाने का निश्चय किया दोनों साथ ही चल पड़े। रास्ते में जंगल का रास्ता पड़ता था।  पुराने ज़माने में मार्ग की यात्रा  बहुत कठिन होती थी।  रास्ता कई विहड़ जंगलों से होकर गुजरता था। मार्ग में हिंसक जानवरों से सुरक्षा के लिए यात्री अपने साथ अस्त्र शस्त्र लेकर चलते थे।…

राजा भोज और महाकवि कालिदास

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राजा भोज विद्वानो और साहित्यकारों को बहुत आदर करते थे । उनके राज्य मे कला, साहित्य और  संस्कृति का बहुत संवर्धन हुआ । उनके  राज्य मे आम नागरिक  भी  संस्कृत  बोलता था । राजा भोज और लकड़हारा के संस्कृत संवाद बहुत मशहूर है ।

राजा भोज के   दरबार मे महान कवि कलीदास रहते थे । कालिदास आशुकवि थे । आशुकवि यानि जो तुरंत कविता  बनादे । राजा भोज के नवरत्नो मे कालिदास को शीर्ष  स्थान प्राप्त था ।
राजा भोज कवियों को कविता  सुनाने पर पुरस्कृत करते थे ।

कवि काव्य रचना करते और  दरबार मे अपनी कविता  सुनाकर पुरस्कार  पाते । एकबार कालिदास भ्रमण  करने निकले थे ।उनहोने एक कवि को सरोवर  किनारे  जामुन के पेड़ के नीचे काव्य रचना करते देखा । कवि महोदय कविता  पुरी नही होने से परेशान थे ।
कालिदास ने उनसे उनकी व्यथा जाननी चाही ।
कवि ने कालिदासको अपनी व्यथा सुना दी
सरोवर के जल मे जामुन  का फल गिरा था ।मछलियाँ फल के पास आती थीं लेकिन उसे खाती नही थी । कवि इसी को कविता  का रुप देना चाहते थे । इस कविता  को राज दरबार  मे सुनाकर ईनाम पाना  चाहते थे । लेकिन उनकि कविता  पुरी नही हो पा रही थी ।
उनकी कविता  इसप्रक…

जीवन में चुनौतियां हमें सजग रखती हैं

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The Challenges in Life To Keep Us On Our Toes जापानियों को हमेशा ताज़ी मछलियां पसंद है। लेकिन जापान के तटीय समुद्र में दशकों से ताज़ी मछलियां नहीं मिल रहीं थी। अतः जापान निवासियों को मछली खिलाने के लिए मछली पकड़ने की बड़ी बड़ी नौकाओं को पहले से कहीं ज्यादा दूर समुद्र में मछली पकड़ने जाना पड़ता था। मछुवारे समुद्र में जितनी दूर जाते थे, उन्हें मछली के साथ वापस लौटने में उतना ही समय लगता था। अगर वापसी का समय ज्यादा दिन का होता तो मछलियां फ्रेश नहीं रह जाती। जापानी लोगों को इन मछलियों का स्वाद अच्छा नहीं लगता था।
 इस समस्या का समाधान करने के लिए मछली पकड़ने वाली कंपनियों ने नाव पर फ्रीजर लगा दिए।
वे अब मछलियां पकड़ते और मछलियों को फ्रीज़ में रख लेते। नाव पर फ्रीज़ लग जाने से वे अब समुद्र में और दूर जाकर मछली पकड़ने में सक्षम हो गए। अब उन्हें फ्रीज़ में मछलियों को ख़राब होने का दर नहीं था। लेकिन जापानियों को ताज़ी मछलियों में और फ्रीज़ की मछलियों के स्वाद में फर्क महसूस हुआ और वे फ्रीज़ की मछलियों को नापसंद करने लगे।


 फ्रीज़ में जमी हुई मछलियों ने कीमत में कमी ला दिया। अतः मछली पकड़ने वाली कंपनियों ने न…

सबसे बड़ा झूठ, प्रतियोगिता

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सबसे बड़ा झुठा कौन . _?एक बार एक राजा के मन मे जिज्ञासा हुई यह जानने की कि उसके राज्य मे सबसे बड़ा झुठ कौन बोलता है ? इसके लिए उसने पुरे राज्य मे ढोल बजा कर फरमान जारी करा दिए। पुरे राज्य मे राजा के कर्मचारी ये संदेश फैला दिए। जो सबसे बड़ा झूठ बोलेगा राजा द्वारा सम्मानित किया जायेगा। इस प्रतियोगिता के लिए एक दीन निश्चित हुआ । राजा के राज्य से दुर दुर के लोग इस प्रतियोगिता मे भाग लेने तथा प्रतियोगिता देखने आए ।


१ झुठा व्यक्ति --- मेरे दादा जी के पास एक खाट थी जिसपर मुहल्ला के सारे लोग सो जाते थे । राज दरबारीयों ने कहा अगर खाट बहुत बड़ी हो तो उसपर इतने लोग आराम से सो सकते हैं। ये कोई झुठ नही हुआ ।
२ झुठा व्यक्ति ---मैने दो औरतों को चुपचाप बैठे हुए देखा। जैसा कि सभी जानते है दो औरत एक दुसरे से बिना बात किए नहीं रह सकती। यह बात सबको झुठ प्रतीत होने लगी। लेकिन दरबारियो ने सोचा कि अगर यह जीत गया तो पुरस्कार की राशी १ हजार स्वर्ण मुद्राए इसे देनी पड़ेगी और राज कोष खाली हो जाएगा । दरबारी चाहते थे कि कोई प्रतियोगी पुरस्कार नहीं जीच पाए ।
दरबारीयों ने फैस…

आम के पेड़ की सहृदयता

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एक समय की बात है, एक बहुत बड़ा आम का पेड़ था। उस पर एक छोटा बच्चा रोज आकर खेल करता था।
वह वृक्ष पर चढ़कर वृक्ष की चोटी पर जाने का प्रयास करता। पेड़ की ठंढी छावँ पे खेलता और पेड़ की डाल्यों से झूम झूम कर प्यार करता। आम का पेड़ भी उसे बहुत प्यार  करता उसे लगता जैसे वो पाने ही शिशु को गोद में खेल रहा हो।


समय बितता गया.... छोटा लड़का अब बड़ा हो गया था अब वह पेड़ के इर्द गिर्द नहीं घूमता नहीं उसे पेड़ के साथ खेलने में विशेष रूचि रह गयी।
एक दिन लड़का पेड़ के पास आया। वह बहुत उदास था उसके चेहरे से उदासी साफ़ झलक रही थी।

आम के वृक्ष ने उसे अपने पास बुलाया और अपने साथ खेलने को कहा।

बच्चे ने उत्तर दिया - अब मैं बच्चा नहीं रहा जो पेड़ से खेलता रहूँ और पेड़ के इर्द गिर्द घूमता रहूँ। मुझे खेलने ने लिए खिलौने चाहिए और खिलौने  खरीदने के लिए पैसे चाहिए।

आम के वृक्ष ने उत्तर दिया ->प्यारे बच्चे मेरे पास तुम्हे देने के लिए पैसे  नहीं  है ,लेकिन तुम मेरे वृक्ष से आम के फल तोड़कर उन्हें बेचकर पैसे अर्जित कर सकते हो।
यह सुनकर बच्चा बहुत उत्साहित हुआ। वह आम के पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ लिए और उन्हें बेचकर पैसे बनाने के…

Tin Mitra Kachhuwa, Hiran aur Kauwa

एक जंगल मे तीन जानवर मित्रता से रहते थे। तीनो मित्र एक दुसरे के काम आते और सुख दुख मे एक दुसरे की मदद करते। ये तीनो मित्र कछुआ , हिरण और कौआ था । ओ तीनो एक दुसरे को उनके दुष्मनो की सुचना देकर सतर्क कर देते। एक दीन कछुआ कुछ लापरवाही के कारण शिकारी के जाल मे फंस गया । कछुआ के बाक़ी मित्रो ने उसे शिकारी के जाल से मुक्त कर ने के लिए एक योजना बनाई । कौआ हिरण से कहा कि तुम शिकारी के मार्ग मे आगे जाकर मृत जानवर की तरह लेट जाओ। शिकारी मार्ग मे दुसरा शिकार देखकर संभव है कछुआ को जमीन पर रखकर तुमको लेने तुम्हारे तरफ जाए। मेरा एक मित्र चुहा वही पेड़ के नीचे सौ बील बनाकर रहता है। मै उसी पेङ पर बैठकर शिकारी की गतिविधि से तुम्हे अवगत कर दुगा और तुम अपनेपास आए शिकारी से सावधान होकर भाग निकलना ।उधर जब शिकारी तुमको लेने आ रहा होगा।मेरा मित्र चुहा कछुआ के बंधन को काट देगा और ओ पास के तालाब मे बिना बिलम्ब किए चला जाएगा।

Shikari Hans aur Dusht Kauwa

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एक बार की बात है़.एक शिकारी जंगल मे शिकार करने गया था. दिन भर शिकार के पीछे दुर दुर तक भागने के बाद भी वह उस दीन कोई शिकार नही कर सका. मृगया के स्रम से थककर वह एक पेड़ के नीचे लेटकर विस्राम करने लगा. आखेट से थके हुए व्याध को शीघ्र ही नींद लग गयी.
 कुछ देर बाद शिकारी के मुह पर धुप पड़ने लगा. उस पेड़ पर एक हंस बैठा था.हंस ने सोचा शरीर पर धुप पड़ने से शिकारी की नींद टुट जाएगी.अतः ओ अपना पंख फैलाकर छॉव कर दिया. धुप से परेशान शिकारी जो बार बार करवट बदल रहा था अब आराम से सोने लगा.



कुछ देर बाद एक कौआ उड़ता हुआ आया और उसी पेड़ पर बैठ गया. कौए ने देखा की एक हंस पंख फैलाए बैठा है.उसने इसका कारण जानना चाहा. नीचे देखा तो पता चला हंस जी शिकारी के परोपकार मे लगे हैं. दुष्ट केजरीवाल रूपी कौए को हंस के इस स्वभाव से ईष्यॉ हो गयी. कौए ने अपनी दुष्टता दिखायी. वह हंस की नीचे वाली डाली पर बैठकर शिकारी के मुहपर मल विस्रजीत कर दिया और उड़कर भाग गया.
 शिकारी चौककर उठा .वह धनुष पर बाण चढाये सोया था. अपने उपर दृष्टी डाली तो पंख फैलाए एक हंस बैठा दिखा.शीघ्रता से निशाना साधकर ओ हंस के उपर छोड़ दिया.इ…

अच्छा आदमी और बुरा आदमी की खोज - दुर्योधन और युधिष्ठिर

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पाण्डवों और कौरवों को शस्त्र शिक्षा देते हुए आचार्य द्रोण के मन में उनकी परीक्षा लेने की बात उभर आई । परीक्षा कैसे और किन विषयो में ली जाये इस पर विचार करते उन्हें एक बात सूझी कि क्यों न इनकी वैचारिक प्रगति और व्यवहारिकता की परीक्षा ली जाये । दूसरे दिन प्रात: आचार्य ने राजकुमार दुर्योधन को अपने पास बुलाया और कहा। वत्स, तुम समाज में से एक अच्छे आदमी की परख करके
उसे मेरे सामने उपस्थित करो।

 दुर्योधन ने कहा--- "जैसी आपकी इच्छा "
और वह अच्छे आदमी की खोज में निकल पड़ा है। कुछ दिनों बाद दुर्योधन
बापस आचार्य के पास आया और कहने लगा--" 'मैंने कई नगरों, गाँवो का
श्रमण क्रिया परन्तु कहीं कोई अच्छा आदमी नहीं मिला । इस कारण में
किसी अच्छे आदमी को आपके पास न ला सका ।"

अबकी बार उन्होंने राजकुमार युधिष्ठिर को अपने पास बुलाया और
कहा -- "बेटा ! इस पृथ्वी पर से कोई बुरा आदमी ढूंढ़ कर ला दो । युधिष्ठिर
ने कहा-ठीक है महाराज, मैं कोशिश करता हुँ।" इतना कहने के बाद
वे बुरे आदमी की खोज में चल दिये।

 काफी दिनों के बाद युधिष्ठिर आचार्य के पास आये । आचार्य ने
पूछा- क्यों ? किसी…

भक्त की निश्छलता - Guileless Devotee

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भक्त की निश्छलता एक बहुत ही भोला व्यक्ति था. शारीरिक कष्ट और गरीबी से परेशान था। उसे किसी व्यक्ति ने सलाह दिया कि तुम भगवान की पूजा क्यों नहीं करते।  भगवान प्रसन्न होंगे तो तुम्हारे सारे कष्ट और निर्धनता दूर  हो जाएगी। लोगों की परामर्श पर वो भगवान विष्णु की आराधना करने लगा। वह बहुत प्रेम से भगवान के लिए सुबह उठ कर फूल  चुनता और विष्णु मंदिर जाकर भगवान का श्रद्धा सुमन अर्पित करता। भगवान की स्तुति कर उनसे अपने रोग क्लेश और दरिद्रता को दूर  करने का अनुरोध करता। एक महीने हो गए उसको भगवन विष्णु के पूजा करते हुए और मंदिर जाते हुए लेकिन उसके कष्ट दूर नहीं हुए। एक दिन भगवान की मंदिर से आते हुए रास्ते में उसे एक दूसरा भक्त मिला जो भगवन शिव की पूजा करके शिव मंदिर से लौट था। विष्णु भक्त ने शिव भक्त से समाचार पूछा और अपनी  व्यथा सुनाई। विष्णु भक्त भोला भाई मई एक महीने से भगवन विष्णु की पूजा कर रहा हूँ लेकिन कुछ लाभ नहीं मिला।  मेरे संकट और क्लेश पूर्ववत सात रहे हैं। शिव भक्त ने उससे भगवन शिव की आराधना करने को कहा। शिव भक्त ने कहा की भगवन शिव आशुतोष है वो हमारी जल्दी सुनते हैं। भगवन शिव धरती पर…

चतुर कौआ - Clever Crow

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जून का महीना था । धूप बडी तेज पड़ रहीं थी।
पशु और पक्षी भी प्यास से घबरा रहे थे । सरोवरों
और तालाबों में पानी सूख गया था।


एक कौआ बडा प्यासा था । वह उड़-उड़कर कई
जगह गया, पर उसे कहीं पानी की एक बूंद भी न
दिखाई दी । हारकर वह एक बगीची में गया । वहाँ उसे एक
लम्बा-सा बर्तन (सुराही )  दिखाई दिया। कौए ने उस
बर्तन के पास जाकर उसमें झांककर देखा । उसके तल
में थोड़ा सा पानी था । कौए की चोंच वहाँ तक पहुंच
नहीं सकती थी । पर उसने आशा नहीं छोडी ।



उसने चारों ओर देखा । समीप ही कुछ कंकड़
पड़े थे । तुरन्त उसे एक उपाय सुझा। वह एक-एक
करके उन कंकडों को लाकर बर्तन में डालने लगा ।
इससे पानी ऊपर चढ़ने लगा । शीघ्र ही पानी पूरा ऊपर किनारे तक आ गया ।
कौए की प्रसन्नता का ठिकाना न था । उसने पानी पीकर अपनी जान बचाई ।

शिक्षा-कठिनाई में प्रयत्न करने पर कोई न कोई
उपाय सूझ ही जाता है ।

चालाक बन्दर और मगर - Clever monkey and crocodile

किसी नदी के किनारे एक बहुत बहा पेड़ था । उस पर एक बन्दर रहता था । उस पेड़ पर बड़े मीठे फल लगते थे । बन्दर उन्हें भरपेट खाता और मौज उडाता । वह अकेले ही मजे में दिन गुजार रहा था ।
एक दिन एक मगर उस नदी में से पेड़ के नीचे आया। बन्दर के पूछने पर मगर ने बताया की वह वहाँ खाने की तलाश में आया है । इम पर बन्दर ने पेड़ से तोड़कर बहुत से मीठे फल मगर को खाने के लिए दिए। इस तरह बन्दर और मगर में दोस्ती हो गई । अब मगर हर रोज़ वहाँ आता और दोनों मिलकर खूब फल खाते । बन्दर भी एक दोस्त पाकर बहुत खुश था ।
एक दिन बात-बात में मगर ने बन्दर को बताया की उसकी एक पत्नी है जो नदी के उस पार उसके घर में रहती है । तब बन्दर ने उम दिन बहुत से मीठे फल मगर को उसकी पत्नी के लिए साथ ले जाने के लिए दिए। इस तरह मगर रोज़ जी भरकर फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी लेकर जाता। मगर की पत्नी को फल खाना तो अच्छा लगता पर पति का देर से घर लौटना पसन्द नहीं था । एक दिन मगर की पत्नी ने मगर से कहा कि अगर वह बन्दर रोज-रोज इतने मीठे फल खाता है तो उसका कलेजा कितना मीठा होगा । मैं उमका कलेजा खाऊँगी। मगर ने उसे बहुत समझाया पर वह नहीं मानी। मगर जोरू क…

धूर्त बगुला और मछलिया - Cunning Heron and Fish

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एक सरोवर में काफी सारी मछलियां रहती थीं। सरोवर में प्रचुर जल था। जल में ख़ुशी ख़ुशी रहती थी और बड़ी प्रसन्नता से जल क्रीणा करते हुए इस किनारे से उस किनारे तक तैरते रहती थी। एक बार ग्रीष्म ऋतू में भीषण गर्मी पड़ी सरोवर का जल सूखने लगा। उस साल मानसून में बरसात भी नहीं हुई सरोवर में जल बहुत ही कम हो गया। इससे मछलियों का जीवन कष्टप्रद हो गया. सभी मछलिया अपने भविष्य के बारे में चिंतित रहा करती थीं। 
एक बगुला था जो सरोवर से  मछलियों का शिकार किया करता था। एक दिन सरोवर किनारे बैठ कर  बगुला रोने लगा। किंनारे पर तैरती हुई मछलियों ने  बगुले को रोते हुए देखा और उससे रोने का कारण पूछा ? बगुले ने बताया की इस सरोवर में बहुत ही कम जल शेष बचा है इससे तुम लोगों  का जीवन संकट में आ गया है। इसके अलावा एक और भारी संकट है जो टाला नहीं जा सकता। पास के गावँ के लोगो ने अगले सप्ताह इसमें मछली पकड़ने के लिए जाल डालने की योजना बनाई है। मैं इसी सब बातों से दुखी हूँ। भोली भली मछलियों को कपटी बगुले के बातों पर विश्वास लगने लगा। मछलियों  ने बगुले को अपना हितैषी जानकार उससे इसका समाधान जानने के लिए कोई उपा…