झगड़ालू बिल्ली और धूर्त बन्दर

झगड़ालू बिल्ली और धूर्त बन्दर - Quarrelsome Cat and Cunning Monkey

एक जंगल में पेड़ के  नीचे दो बिल्लोयों ने घर बना  रखा था। जंगल किनारे एक समृद्ध गावं होने से बिल्लियां पास के  गांव से कभी कभी स्वादिष्ट भोजन लय करती थी।  उनके दिन अच्छे से कट रहे थे।  कभी कभी ग्रामीणों से नजर बचा के वो दूध दही का भी मजा चख लिया करती थी।  ग्रामीण लोगों के अनाज का भंडार उनके आहार का मुख्य स्रोत था। अनाज के भंडार के पास प्रचुर मात्र में चूहे पाए जाते थे। बिल्लियां उन चूहों का शिकार कर मजे से जीवन यापन करते थे।
बिल्लियां जिस पेड़ के नीचे घर बन रखी थी उस पेड़ पर एक बन्दर का आवास था।  बन्दर भी अपने आहार के खोज में कभी कभी पास के गांव में जाया करता था। एक ही जगह आवास होने से और गांव के मार्ग में आते जाते मिलने से बन्दर और बिल्लियों में मित्रता हो गयी थी। इस मित्रता के नाते अब बिल्लियां जब कुछ अच्छा आहार मिलता जिसे बन्दर भी खा सकता था तो बिल्लिया उसे बन्दर के लिए लेते आती थीं।  बन्दर भी बिल्लियों का ख्याल रखता था और जब किसी घर की गृहस्वामिनी गृहकार्य में ब्यस्त होती थी , तो बिल्लियों की उस घर के दूध दही के बारे में ख़ुफ़िया जानकारी दे देता था। जिससे बिल्लियों का दूध दही का शिकार आसान हो जाता था।
एक दिन बिल्लियां दूध दही के शिकार में एक ग्रामीण के घर में घुसी। वह उन्हें दूध ताहि तो नहीं मिला लेकिन घी में चुपड़ी हुए एक दिखने में अति स्वादिष्ट रोटी मिली।
एक रोटी अब कौन खाये कौन उपवास रहे। यदि दोनों खाये तो कौन कितना खाये इस पर बिल्लियों में विवाद हो गया। विवाद जब ज्यादा बढ़ गया तो बिल्लियों ने विचार किया की क्यों न हम इस विवाद को ऐसे मित्र से सुलझाने का प्रयास करने जो हम दोनों की हितैषी हो। यह विचार कर  बिल्लियां रोटी लिए बन्दर के पास  गयी। बन्दर ने बिल्लियों से पास के गांव से एक तराजू लाने को कहा।  झट से बिल्लिया गांव के बनिए से नजर बचा कर उसकी तराजू उठा लायी।

झगड़ालू बिल्ली और धूर्त बन्दर


अब बन्दर ने रोटी में बिल्लियों के लिए हिस्सा लगाना शुरू किया। बन्दर ने रोटी को दो भाग में तोड़ा  और तराजू के दोनों पलड़ो पर रख दिया।  तराजू के दोनों पलड़ो पर आसमान रोटी का भार होने से तुला संतुलित नहीं था। तुला को संतुलित करने के लिए बन्दर अधिक वजन वाले रोटी के टुकड़े से रोटी तोडता  और अपने मुंह में रख लेता।  उसके ऐसा करने से दूसरा पलड़ा भारी हो जाता।  अब बन्दर इस पलड़े से रोटी के टुकड़े में से कुछ टुकड़े तोडता और खा लेता। ऐसा करते करते बन्दर सारी  रोटी के टुकड़े खा गया अब तराजू के पलड़े भी संतुलित थे। बिल्लियों के आपस में झगड़ने से बन्दर को लाभ हो गया और बिल्लियां रही।
कहानी का भावार्थ :->
जब  हम आपस में लड़ते हैं तो फ़ायदा हमें नहीं होता , हमारे आपस में कलह से दूसरे को लाभ हो जाता है। अतः छोटे छोटे लाभ के लिए हमें आपस में नहीं लड़ना चाहिए।   

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