संदेश

June, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बृद्ध ब्याघ्र की कथा

चित्र
बृद्ध ब्याघ्र की कथा - Old Tiger's Tale एक जंगल में एक बुढा बाघ रहता था।  बृद्धा अवस्था के कारण उसके नख और दांत कमजोर पड़ गए थे, अतः वो शिकार नहीं कर पता था।  एक दिन उसे किसी तालाब के किनारे स्वर्ण कंगन ("सोने का कंगन") मिला। वह तालाब दलदल वाला तालाब था उसमे जंगली जानवर सावधानी से किनारे पर जाकर अपनी प्यास बुझ लेते  थे तालाब के अंदर दलदल के कारण कोई पैर नहीं रखता था।

शिकार कर अपनी उदर पूर्ति करने में असमर्थ बृद्ध ब्याघ्र ने सोचा की क्यों न मैं इस कंगन के लालच में अपने शिकार को फसांउं इससे मुझे शिकार को मारने में आसानी हो जाएगी।

अब बाघ सरोवर के किनारे बैठ कर किसी पथिक को देख कर जोर जोर से मनुष्य की बोली में आवाज़ लगता। कंगन ले लो ! कंगन ले लो ! ये कंगन मैं दान कर रहा हूँ कंगन ले लो। 
बाघ रोज ऐसा ही प्रयास करता रहा लेकिन जंगल के रास्ते आने जाने वाले लोग उसकी बात को अनसुनी कर देते और सावधान होकर चले जाते।

एक दिन दानवीर बाघ की आवाज़ किसी लालची पथिक के कान में पड़ी, लालच के वशीभूत होकर वो कुछ पल के लिए मार्ग में रुक गया, फिर बाघ से दान कैसे सम्भव ऐसा सोच अपने को सम्भाल कर चल…

वृद्ध गिद्ध और चालाक बिल्ली

चित्र
वृद्ध गिद्ध जरद्गव और चालाक बिल्ली  - Aged Vulture a Cunning Cat गोदावरी नदी के तट पर एक विशाल सेमल का पेड़ था। उसपर प्रत्येक दिशाओं से पक्षी आकर रात्रि में विश्राम करते थे। पक्षी दीं में सुबह सुबह अपने चारे के खोज में निकल जाते थे और रात्रि में अपने बच्चों के लिए ("जो अपनी चारा अभी नहीं चुन सकते") KUCHH CHARA लेते आते थे।  उनका दिन बहुत अच्छे से कट रहा था।  विशाल सेमल का पेड़ आवास जो था उनका।

वृद्ध गिद्ध उस पेड़ पर एक बूढ़ा गिद्ध  भी रहता था।  गिद्ध बूढ़ा हो जाने के कारण शिकार करने में असमर्थ था। पक्षी उसे अपने बूढ़े पितामह की तरह आदर करते थे। शाम को लौटते समय सभी यथासम्भव आहार उस बूढ़े गिद्ध के लिए ले आने का नित्य प्रयत्न करते थे।  पक्षी संख्या में बहुत ज्यादा थे अतः उनका थोड़ा थोड़ा प्रयत्न भी उस बूढ़े गिद्ध के बड़े उदर की पूर्ति के लिए पर्याप्त था। बदले में सम्माननीय गिद्ध महोदय पक्षियों के बच्चों की रक्षा कर दिया करते थे। पक्षी दिन भर अपने बच्चों और अंडो की सुरक्षा की परवाह से निश्चिंत होकर आहार चुनते थे और रात में सुख से आकर अपने बच्चों के साथ रहते थे।


पेड़ के नीचे एक मार्जार अर्थ…

एक उदर और दो ग्रीवा - भारुंड पक्षी की कथा

चित्र
एक उदर और दो ग्रीवा - भारुंड पक्षी की कथा एक सरोवर में एक भारुंड पक्षी रहता था। वो सरोवर के मधुर जल में विचरण करता था. सरोवर के किनारे फलों वाले वृक्ष थे जिनसे पके हुए मधुर फल सरोवर के जल में गिरते थे और भारुंड पक्षी उसे खाकर बहुत आनन्दित होता था।

एक दिन भारुंड पक्षी को एक अति ही  मधुर फल मिला। इस पक्षी  के एक  उदर  और  दो  ग्रीवा और  मुंह  थे।   वो पहले ग्रीवा से फल को पकड़ कर मुंह से निगलने के लिए तैयार हुआ। दूसरे मुख  ने उससे कहा की हर बार तुम्ही मधुर फल खाते हो। इस बारमुझे फल का स्वाद लेने दो . इस बात पर पहले मुंह ने कहा कि हम दोनों का एक ही उदर है।  फल चाहे  मैं  खाऊं या तुम खावो  वो तो एक ही उदर में जाने है। अतः तुम मुझे फल खा लेने दो मुझे मत रोको। यह कहते हुए पहले मुंह ने फल को निगल लिया .इस पर दूसरे मुंह को बहुत गुस्सा आया वह बहुत दुखी  हुआ . वो इस बात के लिए पहले मुंह से बदला लेने के लिए योजना बनने लगा।
एक दिन सरोवर में विचरते हुए दूसरे  मुंह  वाले ने विषैले फल देखा। उसने यह फल खाने का विचार किया . उसके इस विचार से  पहले मुंह  वाला  बहुत  डर गया  . उसने  उसे  फल भक्षण  करने …

एकलव्य की गुरु भक्ति

चित्र